सस्ती खाद का दावा, लेकिन वैश्विक कीमतों का दबाव—कितनी टिकाऊ है सरकार की रणनीति ?
उर्वरक महंगाई का बोझ छुपा रही सब्सिडी? 41,000 करोड़ के बावजूद किसानों की चिंता बरकरार

निश्चय टाइम्स | न्यूज डेस्क
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने उर्वरक कीमतों पर राहत का बड़ा दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत और दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का बोझ किसानों पर न डालने की बात कही है, मगर इसके लिए 41,000 करोड़ रुपये की भारी सब्सिडी का सहारा लिया जा रहा है—जो भविष्य में आर्थिक दबाव का कारण बन सकता है।
सरकार के अनुसार किसानों को यूरिया 266 रुपये और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इतनी बड़ी सब्सिडी लंबे समय तक जारी रख पाना संभव होगा?
प्रेसवार्ता में मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार वैश्विक महंगाई का बोझ खुद उठा रही है ताकि किसानों की लागत न बढ़े। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह मॉडल टिकाऊ नहीं है और भविष्य में इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ सकता है, जिससे अन्य विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, उर्वरक सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भरता से किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग की आदत भी कमजोर हो सकती है। लंबे समय से यह देखा गया है कि सस्ती यूरिया की वजह से किसान उसका अधिक उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है।
हालांकि सरकार प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके परिणाम अभी सीमित ही दिखाई देते हैं। नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून की तैयारी की बात भी की गई, मगर विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से मौजूद कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन ही बड़ी चुनौती बना हुआ है।
किसान संगठनों का यह भी कहना है कि केवल सब्सिडी देकर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्हें बेहतर बाजार, लागत नियंत्रण, और फसल के उचित मूल्य की जरूरत है।
इस बीच सरकार द्वारा घोषित योजनाएं और राहत पैकेज उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन असली परीक्षा उनके क्रियान्वयन और दीर्घकालिक प्रभाव में ही होगी।

