महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम, विपक्ष ने BJP पर लगाया बड़ा आरोप
जनगणना टालने और वोट बैंक साधने की साजिश? ‘पीडीए’ के नाम पर घमासान तेज

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्षी खेमे ने Bharatiya Janata Party पर तीखा हमला बोलते हुए इस कदम को “जल्दबाज़ी में लिया गया राजनीतिक निर्णय” करार दिया है। आरोप लगाया जा रहा है कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण से ज्यादा चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
विपक्ष का कहना है कि सरकार जानबूझकर जनगणना को टाल रही है, क्योंकि यदि जनगणना होती है तो जातिगत आंकड़ों की मांग तेज होगी, जिससे आरक्षण के मुद्दे पर दबाव बढ़ेगा। उनके मुताबिक, यह कदम ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) और आधी आबादी यानी महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि भाजपा की राजनीति हमेशा नए वोटरों को लुभाने की रही है, और इस बार महिलाओं को केंद्र में रखकर वही रणनीति दोहराई जा रही है। विपक्ष का दावा है कि महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन-यापन लागत ने महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ रही है।
खासतौर पर घरेलू खर्च और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिसमें सरकारी स्कूलों की स्थिति और पहुंच पर सवाल खड़े किए गए हैं।
मेरठ और नोएडा जैसे इलाकों का हवाला देते हुए विपक्ष ने दावा किया कि वहां की कामकाजी और घरेलू महिलाओं की स्थिति सरकार के दावों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने चुनौती दी कि यदि यह बिल वास्तव में महिलाओं के हित में है, तो इसे जमीनी स्तर पर जाकर घोषित किया जाना चाहिए।
इस बीच, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और महिला सशक्तिकरण के अपने एजेंडे को मजबूत बताया है। हालांकि, इस मुद्दे ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।



