चिकित्सा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का नया इतिहास: मात्र 480 ग्राम की ‘नैनो प्रीमी’ बच्ची ने जीती 84 दिनों की जंग

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क :
उत्तर प्रदेश की प्रांतीय राजधानी में नवजात गहन चिकित्सा (नियोनेटोलॉजी) के क्षेत्र में एक ऐसा चमत्कार हुआ है जिसने चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। लखनऊ के डालीगंज स्थित चिल्ड्रेन्स मेडिकल सेंटर (सीएमसी) के डॉक्टरों की टीम ने मात्र 480 ग्राम की अत्यंत नाजुक नवजात बच्ची को 84 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
अल्ट्रा-लो बर्थ वेट और समय से पूर्व जन्म की चुनौती यह नन्ही बच्ची केवल 26 सप्ताह की गर्भावस्था में ही दुनिया में आ गई थी। अत्यंत कम वजन (Extremely Low Birth Weight) और फेफड़ों के पूरी तरह विकसित न होने के कारण उसे 2 महीने 12 दिन (84 दिन) तक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में रखना पड़ा। इस दौरान बच्ची के जीवन को बचाने के लिए उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया तथा आवश्यकतानुसार रक्त (ब्लड) भी चढ़ाया गया।
685 ग्राम का पिछला रिकॉर्ड टूटा, बनी प्रदेश की सबसे नन्ही उत्तरजीवी चिल्ड्रेन्स मेडिकल सेंटर की इस अभूतपूर्व सफलता के बाद यह बच्ची अब उत्तर प्रदेश में चिकित्सा इतिहास की सबसे कम वजन वाली जीवित बचने वाली नवजात बन गई है। इस सफलता ने प्रदेश के ही पिछले 685 ग्राम के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी इतने कम वजन के शिशु का जीवित बचना एक अत्यंत दुर्लभ और विस्मयकारी उपलब्धि माना जा रहा है।
स्वस्थ पैरामीटर्स और डॉक्टरों का अनथक प्रयास कठिन चिकित्सा यात्रा के बाद आज बच्ची का वजन बढ़कर 770 ग्राम हो चुका है। वह अब बिना किसी कृत्रिम सपोर्ट के प्राकृतिक रूम ऑक्सीजन पर सांस ले रही है और हर 3 घंटे में सामान्य रूप से 15 मिलीलीटर दूध का सेवन कर रही है। बच्ची के सभी जैविक पैरामीटर्स पूरी तरह सामान्य हैं। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आशुतोष वर्मा ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह सफलता हमारी पूरी टीम की अथक मेहनत और वैज्ञानिक समर्पण का परिणाम है। वेंटिलेटर से प्राकृतिक सांस लेने की प्रक्रिया और वजन में निरंतर बढ़ोतरी का हर छोटा कदम हमारे लिए एक अभूतपूर्व विजय है।”



