राजनीति

वोटर स्लिप वितरण शुरू, लेकिन चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

डोर-टू-डोर VIS अभियान में गड़बड़ी की आशंका, पहचान को लेकर भी भ्रम बरकरार

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच Election Commission of India द्वारा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से पहले वोटर इंफॉर्मेशन स्लिप (VIS) का वितरण शुरू कर दिया गया है। यह वितरण 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले मतदाताओं तक जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

आयोग के अनुसार VIS में मतदाता की जानकारी, मतदान केंद्र का स्थान, समय और दिशा-निर्देश शामिल हैं। साथ ही QR कोड जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे मतदाता अपनी जानकारी आसानी से सत्यापित कर सकें। बावजूद इसके, VIS को मतदान के लिए वैध पहचान पत्र के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

VIS का वितरण बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर किया जा रहा है। लेकिन इतनी व्यापक प्रक्रिया में त्रुटियों, देरी और संभावित गड़बड़ियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।

विशेष रूप से, VIS के अनधिकृत वितरण या कब्जे को लेकर सख्त चेतावनी भी जारी की गई है। Representation of the People Act, 1951 और अन्य प्रावधानों के तहत इसे दंडनीय अपराध बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस प्रक्रिया में संभावित दुरुपयोग की आशंका पहले से ही जताई जा रही है।

दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए ब्रेल युक्त AVIS की व्यवस्था को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच और प्रभावशीलता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

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