ज़ीरो टॉलरेंस’ के दावों की उड़ी धज्जियां! आयुष विभाग में रिटायर्ड मठाधीश और ‘भांजे श्री’ का खुला खेल
तबादलों में पार हुआ एकतरफा माल!

‘जीरो टॉलरेंस’ सरकार में तबादला संग्राम! आयुष विभाग में खुली बगावत
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ का दम भरने वाली सरकार के दावों की हवा खुद आयुष विभाग ने निकाल दी है! विभाग में इस समय ‘सिस्टम लूट’ का ऐसा खेल चल रहा है, जहां नियम-कानूनों को ताक पर रखकर एकतरफा माल पार किया जा रहा है। डॉ. एस. अहमद ने एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए सीधे विभाग के ‘भांजे श्री’ और रिटायर्ड मठाधीश इकबाल अहमद सिद्दीकी पर उंगली उठाई है। आरोप है कि रिटायर होने के बाद भी सिद्दीकी साहब ‘भांजे श्री’ के रसूख और सानिध्य में बैठकर पूरे विभाग के ट्रांसफर-पोस्टिंग का रिमोट कंट्रोल थामे हुए हैं।
इस अंदरूनी सिंडिकेट और बंदरबांट के खिलाफ अब विभाग की महानिदेशक चौत्रा वी. ने सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। महानिदेशक ने हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर तबादलों को अवैध बताते हुए उन्हें तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका साफ़ आरोप है कि ट्रांसफर नीति 2026-27 की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। ग्रुप ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों को बिना विभागाध्यक्ष की अनुमति के इधर से उधर फेंक दिया गया, जबकि मलाईदार कुर्सियों पर बैठे चहेते दस-दस साल से एक ही जगह जमे हुए हैं।
विवाद को और हवा तब मिली जब विभाग से जुड़े कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि रिटायर हो चुके प्रभावशाली चेहरे अब भी तबादला और पोस्टिंग की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. एस. अहमद ने आरोप लगाया है कि विभाग में कुछ ऐसे लोगों का प्रभाव बना हुआ है जो आधिकारिक रूप से सेवा में नहीं हैं, लेकिन फैसलों पर उनकी पकड़ बनी हुई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, निदेशालय स्तर के अधिकारियों का कहना है कि सभी कार्रवाई शासनादेश के अनुरूप की गई है और नियमों का पालन किया गया है। वहीं प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है।
आयुष विभाग में अब सवाल केवल तबादलों का नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकार, नियमों की व्याख्या और विभागीय शक्ति-संतुलन का बन गया है। सरकारी गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल, आयुष विभाग की इस अंदरूनी जंग ने सरकार के ‘सुशासन’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को विपक्ष और आलोचकों के निशाने पर ला खड़ा किया है।



