राजनीति

मायावती का मिशन मोड ऑन! बीजेपी-कांग्रेस पर साधा निशाना, कार्यकर्ताओं को दिया चुनावी मंत्र

‘वोट बचाओ, सम्मान बचाओ’ का नारा बुलंद, हिमाचल-जम्मू में BSP ने तेज की सियासी तैयारी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर संगठन को चुनावी मोड में लाने का बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को लखनऊ स्थित बीएसपी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर इकाइयों की समीक्षा बैठक के दौरान मायावती ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल संगठन विस्तार ही नहीं, बल्कि चुनावी सफलता को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में मायावती ने पार्टी की जमीनी मजबूती और सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से पार्टी को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि बहुजन समाज को अपने वोट की सुरक्षा उसी तरह करनी होगी जैसे वे अपनी इज्जत, आत्मसम्मान और जान-माल की रक्षा करते हैं।

बैठक के दौरान ‘बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा’ और ‘बीएसपी को आगे बढ़ाना है’ जैसे नारों को जन-जन तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि बहुजन समाज को भाईचारे के आधार पर जोड़ने का अभियान लगातार तेज किया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बने राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हुई। मायावती ने कहा कि वहां की जनता कांग्रेस और बीजेपी दोनों से निराश दिखाई दे रही है, ऐसे में बीएसपी के पास खुद को एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने का अवसर है। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे जनता के बीच जाकर इस विकल्प को मजबूती से प्रस्तुत करें।

जम्मू-कश्मीर की समीक्षा बैठक में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के लंबे समय से लंबित वादे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस देरी से आम लोगों में निराशा बढ़ रही है और क्षेत्रीय विकास प्रभावित हो रहा है। लोगों के बीच असुरक्षा और अनिश्चितता की भावना भी बनी हुई है।

मायावती ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी बहुजन समाज गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों में शोषित से शासक वर्ग बनने की सोच विकसित करें और अंबेडकरवादी आंदोलन को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाएं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए बीएसपी अब संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ राजनीतिक आक्रामकता भी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। मायावती के ताजा निर्देश इसी बड़े चुनावी अभियान का संकेत माने जा रहे हैं।

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