तेल माफिया और कंपनियों पर मंत्री का चाबुक
जनता का हक मारने वालों पर 'नो टॉलरेंस', सीमाओं पर कालाबाजारी का खुला खेल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क,
उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस वितरण के नाम पर चल रहे तेल माफियाओं के काले खेल और पेट्रोलियम कंपनियों की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने साफ कर दिया है कि उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने वाले भ्रष्ट डीलरों और अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लखनऊ के बापू भवन में हुई एक आपात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने पेट्रोलियम कंपनियों के आला अफसरों और विभागीय अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई।
सरकार के पास लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि नेपाल और बिहार की सीमाओं से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में पेट्रोल और डीजल का कृत्रिम अभाव (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) पैदा किया जा रहा है। असली उपभोक्ताओं को तेल देने के बजाय, ज्यादा मुनाफे के लालच में पेट्रोलियम उत्पादों की धड़ल्ले से जमाखोरी और दूसरे राज्यों व सीमा पार कालाबाजारी की जा रही है। मंत्री ने इस पर तीखी नाराजगी जताते हुए इसे खुली लूट करार दिया और जिला पूर्ति अधिकारियों को तुरंत छापेमारी कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
गैस सिलेंडरों की लूट पर लगेगी लगाम, बिना e-KYC नो रिफिल घरेलू एलपीजी गैस वितरण में चल रही भारी अनियमितताओं और अवैध रीफिलिंग के सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए भी मंत्री ने सख्त फरमान जारी किया है। अब बिना e-KYC (ई-केवाईसी) और आवश्यक विभागीय अनुमोदन (DAC) के किसी भी उपभोक्ता को गैस सिलेंडर रिफिल नहीं किया जाएगा। गैस एजेंसियों द्वारा होम डिलीवरी न देकर उपभोक्ताओं को परेशान करने की शिकायतों पर मंत्री ने चेताया कि शत-प्रतिशत होम डिलीवरी न देने वाली एजेंसियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। वहीं पीएनजी (PNG) के सुस्त विस्तार पर भी कंपनियों को फटकार पड़ी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जमाखोरी, घटतौली और जनता के हक से खिलवाड़ करने वालों के लिए यूपी में जेल ही एकमात्र रास्ता है।



