
निश्चय_टाइम्स_न्यूज_डेस्क
देश के बैंकिंग सेक्टर के ‘सिंघम’ यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर अपना कड़ा तेवर दिखाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस बार केंद्रीय बैंक के गुस्से का शिकार बनी है जानी-मानी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी कैन फिन होम्स लिमिटेड (Can Fin Homes Ltd)। आरबीआई ने कंपनी के ढीले रवैये और ‘फेयर Practices कोड’ की धज्जियां उड़ाने पर ₹2.70 लाख का करारा मौद्रिक जुर्माना ठोक दिया है। 18 जून 2026 को जारी इस कड़े आदेश के बाद से ही पूरे होम लोन मार्केट और वित्तीय गलियारों में सनसनी फैल गई है।
ग्राहकों की जेब पर डाका या बड़ा झोल? किस्त के ‘सीक्रेट’ पर मचा बवाल
इस पूरी कार्रवाई के पीछे जो कहानी निकलकर सामने आई है, वो काफी चटपटी और चौंकाने वाली है। दरअसल, कंपनी अपने होम लोन ग्राहकों से हर महीने चुपचाप ईएमआई (EMI) तो वसूल रही थी, लेकिन उस किस्त की मलाई में ब्याज (Interest) कितना है और आपकी जेब से कटने वाला असली मूलधन (Principal) कितना है, इसका साफ-साफ हिसाब-किताब नहीं दे रही थी। यानी ग्राहकों को अंधेरे में रखकर ये पूरा खेल चल रहा था, जिसे आरबीआई ने पकड़ लिया और कंपनी की क्लास लगा दी।
नेशनल हाउसिंग बैंक के ‘सरप्राइज ऑडिट’ में खुला राज
कंपनी का यह राज तब खुला जब नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) ने 31 मार्च, 2025 की वित्तीय स्थिति को खंगालने के लिए एक कड़ा स्टैट्यूटरी निरीक्षण किया। इस ऑडिट में जब भारी अनियमियताएं और नियमों की अनदेखी सामने आई, तो आरबीआई ने कंपनी को ‘कारण बताओ नोटिस’ थमा दिया। कैन फिन होम्स के बड़े-बड़े अधिकारियों ने पर्सनल हियरिंग में कई दलीलें दीं, लेकिन केंद्रीय बैंक के कड़े रुख के आगे उनकी एक न चली। आखिरकार, नेशनल हाउसिंग बैंक अधिनियम, 1987 की धारा 52ए के तहत यह दंडात्मक चाबुक चला दिया गया।
डील पक्की, लेकिन बदमाशी नहीं चलेगी: आरबीआई की दो टूक
आरबीआई ने साफ शब्दों में कहा है कि यह जुर्माना सिर्फ नियमों की अनदेखी और लापरवाही सुधारने के लिए है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि ग्राहकों के साथ किए गए एग्रीमेंट अमान्य हो गए हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह सस्पेंस भी छोड़ दिया है कि अगर आगे भी ऐसी मनमानी जारी रही, तो कंपनी के खिलाफ और भी बड़े और सख्त एक्शन लिए जा सकते हैं।



