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प्रोजेक्ट ADHUNA के तहत ‘CPD 2.0’ का शंखनाद: प्रीटर्म नवजातों की सुरक्षा के लिए डॉक्टरों ने कसी कमर!

#निश्चय_टाइम्स_न्यूज_डेस्क

देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और वैश्विक मानकों पर ले जाने के लिए फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। फॉग्सी द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट अधूना’ (प्रोजेक्ट ADHUNA) के तहत लखनऊ के प्रतिष्ठित होटल क्लार्क्स अवध में एक उच्च-स्तरीय ‘CPD 2.0’ (कंटिन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट) कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य समय से पहले पैदा होने वाले (प्रीटर्म) शिशुओं की मृत्यु दर को रोकना और उनके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।

लखनऊ में जुटा दिग्गजों का पैनल; चिकित्सा जगत को मिला नया मार्गदर्शन

प्रोजेक्ट ADHUNA के अंतर्गत देशभर से चुने गए 29 विशेष जिलों में नवाबों की नगरी लखनऊ भी शामिल रही। इस बेहद महत्वपूर्ण सत्र का नेतृत्व फॉग्सी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल (प्रेसिडेंट, FOGSI 2026) और प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. जयदीप टैंक (पास्ट प्रेसिडेंट, FOGSI 2024) ने किया। लखनऊ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से आयोजित इस सत्र को डॉ. प्रीति कुमार (वाइस प्रेसिडेंट- फॉग्सी) और डॉ. सीमा मेहरोत्रा के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिसमें जिला IAP चैप्टर के मास्टर ट्रेनर्स ने भी अपनी भागीदारी दर्ज की।

गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक: प्रीटर्म डिलीवरी रोकने का अचूक फॉर्मूला

इस कार्यशाला में चार प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा की निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स को प्रीमैच्योरिटी केयर पाथवे के तहत निम्नलिखित प्रमुख क्लिनिकल विषयों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण (लाइव ड्रिल्स) दिया गया:

  • शुरुआती स्क्रीनिंग: गर्भकाल निर्धारण और सर्वाइकल लेंथ स्क्रीनिंग के जरिए प्रीटर्म जन्म के जोखिम का सटीक आकलन।
  • साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप: प्रसव को टालने या शिशु को सुरक्षित रखने के लिए सर्वाइकल सर्क्लाज, एंटिनेटल कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स, एंटीबायोटिक्स, टोकॉलाइटिक्स और मैग्नीशियम सल्फेट का सही उपयोग।
  • लेबर रूम प्रबंधन: प्रसव का सही समय, फिटल मॉनिटरिंग और प्रसव के तुरंत बाद ‘डिलेयड कॉर्ड क्लैम्पिंग’ (Delayed Cord Clamping) की आधुनिक तकनीक।

प्यूरीपरल देखभाल और नियोनेटल केयर के क्रांतिकारी नवाचार

कार्यशाला के अंतिम सत्र में नवजातों को जीवनदान देने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों पर विशेष सत्र हुआ। इसमें ‘कंगारू मदर केयर’ (KMC) की तत्काल शुरुआत, ‘मदर–न्यूबॉर्न केयर यूनिट’ (MNCU) मॉडल और गंभीर स्थिति में नवजात परिवहन के लिए पोर्टेबल CPAP जैसे लाइफ-सेविंग नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, प्रसव के बाद माताओं के मानसिक स्वास्थ्य और स्तनपान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर डॉक्टरों को विशेष रूप से जागरूक किया गया।

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