लखनऊ

राजधानी में आबकारी विभाग की शह पर ओवररेटिंग का खेल: साक्ष्य देने पर भी कटघरे में शिकायतकर्ता!

₹210 की बोतल के लिए ₹220 वसूली का दावा, शिकायत पर आबकारी अधिकारी के जवाब ने खड़े किए सवाल

लेनदेन नंबर और बोतल के साक्ष्य दिखाने के बाद भी शिकायतकर्ता से मांगा गया अतिरिक्त प्रमाण

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

उत्तर प्रदेश की राजधानी में शराब की दुकानों पर प्रिंट रेट से अधिक वसूली (ओवररेटिंग) का काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है। नियमों की धज्जियां उड़ा रहे शराब माफियाओं पर नकेल कसने के बजाय आबकारी विभाग का रवैया बेहद शर्मनाक और कटघरे में खड़ा करने वाला है। आरोप है कि साक्ष्यों के साथ शिकायत करने पहुंचे पीड़ितों की सुनवाई करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी ओवररेटिंग करने वाले दुकानदारों की वकालत में उतर आते हैं।

डिजिटल लेनदेन के सबूत भी बेअसर

मामला बीते 4 अगस्त 2026 की रात का है। पीड़ित शिकायतकर्ता ने रात 8:04 बजे शराब की एक बोतल खरीदी, जिस पर स्पष्ट अंकित मूल्य ₹210 था। हालांकि, दुकानदार ने क्यूआर कोड स्कैन कराकर ऑनलाइन माध्यम से ₹220 (ट्रांजैक्शन नंबर: 621641470823) वसूल लिए। तय कीमत से अधिक वसूली का पक्का सबूत हाथ में होने के बावजूद जब न्याय की गुहार लगाई गई, तो व्यवस्था का असली चेहरा उजागर हो गया।

जिला आबकारी अधिकारी का अजीबो-गरीब तर्क

जब पीड़ित ने बैंक ट्रांजैक्शन नंबर और खरीदी गई बोतल के साक्ष्य जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह के समक्ष प्रस्तुत किए, तो अधिकारी का रवैया सहयोगात्मक होने के बजाय पीड़ित का मनोबल तोड़ने वाला रहा। अधिकारी ने कार्रवाई करने के बजाय उल्टे फरमान सुनाते हुए कहा कि “यह कैसे साबित होगा कि यह भुगतान इसी बोतल का है? जाइए, गूगल वीडियो और फोटो लेकर आइए, तब कार्रवाई होगी।”

भ्रष्ट गठजोड़ और प्रशासनिक नाकामी

राजधानी में जिम्मेदार अधिकारियों का ऐसा रवैया स्पष्ट संकेत देता है कि आबकारी तंत्र और ओवररेटिंग करने वाले दुकानदारों के बीच सांठगांठ कितनी गहरी हो चुकी है। डिजिटल पेमेंट के साक्ष्य को भी नकारना उपभोक्ता अधिकारों का खुला मखौल उड़ाना है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या राजधानी में नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं?

Related Articles

Back to top button