
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी उद्योग जगत से भारत में निवेश और कारोबारी साझेदारियों को और मजबूत करने का आह्वान किया है। नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित जापानी प्रतिनिधिमंडल के सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, विनिर्माण, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और भविष्य की अर्थव्यवस्था तक फैल रही है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।
गोयल ने कहा कि भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, विकास और समृद्धि के साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विशाल युवा आबादी और तेजी से बढ़ता बाजार जापान की तकनीक, पूंजी और विशेषज्ञता के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहा है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश को इस साझेदारी का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, विशाल बाजार, कुशल युवा कार्यबल और तेजी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा जापानी कंपनियों के लिए राज्य को आकर्षक बनाता है।
गोयल ने बताया कि जुलाई 2026 में हुए 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में जापान ने अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य रखा है। उन्होंने एआई, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी को भविष्य के प्रमुख क्षेत्र बताया।
भारत में इस समय 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। सुजुकी, टोयोटा, होंडा, सोनी, हिताची और मित्सुबिशी जैसी कंपनियां भारत के औद्योगिक विकास में योगदान दे रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.5 अरब डॉलर रहा और जापान भारत में एफडीआई का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में 90 लाख से अधिक एमएसएमई, मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 27 औद्योगिक क्लस्टर निवेश की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं।
गोयल ने कहा कि वह 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने जापानी कंपनियों से भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, को अपने विकास और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने की अपील की।



