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देश का पैसा जा रहा विदेश: जोखिम भरे कर्जों पर उछला विदेशी निवेश, इक्विटी (Equity) में गिरावट से बढ़ी चिंता

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। जुलाई 2026 के आउटवर्ड फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (OFDI) के आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय पूंजी तेजी से विदेशों की ओर पलायन कर रही है (Capital Flight)। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि यह निवेश ठोस हिस्सेदारी के बजाय जोखिम भरे कर्जों और गारंटियों पर टिका है।
आंकड़ों में छिपी कड़वी सच्चाई
- विदेशी निवेश में भारी उछाल: जहां देश के भीतर उद्योगों को पूंजी की सख्त जरूरत है, वहीं जुलाई 2026 में देश से बाहर जाने वाला कुल निवेश (Total Financial Commitment) अचानक बढ़कर 5,705.42 मिलियन डॉलर (लगभग 5.7 अरब डॉलर) तक पहुंच गया। पिछले महीने (जून 2026) में यह आंकड़ा केवल 3,148.99 मिलियन डॉलर था।
- ठोस निवेश (Equity) में गिरावट: सबसे डरावना पहलू यह है कि विदेशी निवेश में ‘इक्विटी’ (ठोस हिस्सेदारी) साल-दर-साल घटी है। जुलाई 2025 में इक्विटी 2,077.70 मिलियन डॉलर थी, जो जुलाई 2026 में गिरकर मात्र 2,019.42 मिलियन डॉलर रह गई।
- कर्ज और गारंटी का खतरनाक जाल: भारतीय कंपनियां विदेश में ठोस निवेश करने के बजाय अंधाधुंध कर्ज बांट रही हैं। जुलाई 2025 (432.66 मिलियन डॉलर) के मुकाबले जुलाई 2026 में कर्ज (Loan) दोगुने से भी अधिक होकर 876.24 मिलियन डॉलर हो गया है। इसके साथ ही, 2,809.76 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम ‘गारंटी’ भी जारी की गई है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय कंपनियां विदेशों में उच्च जोखिम वाले दांव खेल रही हैं। देश का पैसा बाहर जाने से न केवल घरेलू निवेश पर नकारात्मक असर पड़ेगा, बल्कि कर्ज और गारंटी का यह बढ़ता पहाड़ भविष्य में एक बड़े आर्थिक संकट का कारण भी बन सकता है।



