गहराता व्यापार घाटा: बढ़ते आयात और व्यापार संतुलन के बिगड़ते हालात ने बढ़ाई चिंता

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यापार संतुलन का मोर्चा चिंताजनक मोड़ लेता दिख रहा है। पीआईबी (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान देश का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 49.43 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 32.32 अरब डॉलर था। व्यापार घाटे में यह भारी उछाल देश के वित्तीय संतुलन पर गंभीर दबाव की ओर इशारा कर रहा है।
जुलाई 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो आयात की रफ्तार निर्यात की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। जुलाई 2026 में कुल आयात 15.83% की दर से बढ़कर 95.16 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि निर्यात में यह वृद्धि 13.31% (80.14 अरब डॉलर) ही रही। मर्चेंडाइज क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहाँ जुलाई महीने में ही व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर (44.24 अरब डॉलर निर्यात बनाम 76.22 अरब डॉलर आयात) हो गया है।
चीन और रूस जैसे देशों से आयात में भारी वृद्धि (क्रमशः 34.42% और 83.85%) से विदेशी वस्तुओं पर देश की निर्भरता साफ छलकती है। लगातार बढ़ता आयात न केवल विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या घरेलू विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक बाजार की मांग और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में पिछड़ रहा है। अगर आयात की यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में रुपया और अधिक दबाव में आ सकता है।



