
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
मर्चेन्ट्स चैम्बर ऑफ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक समिति की ओर से सर पदमपत सिंघानिया सभागार में आयोजित ‘महफ़िल-ए-ग़ज़ल’ ने संगीतप्रेमियों को सुरों और भावनाओं की खूबसूरत दुनिया में पहुंचा दिया। शहर के प्रतिष्ठित ग़ज़ल गायकों की शानदार प्रस्तुतियों से सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक समिति के चेयरमैन स्वतंत्र सिंह ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों से केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात ग़ज़ल गायक एवं संगीतकार गुरु युगान्तर सिंदूर की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आई.एम. रोहतगी, सांस्कृतिक समिति के वाइस-चेयरमैन विमल झाझरिया और काउंसिल सदस्य विजय पाण्डेय ने उनका स्वागत स्मृति-चिह्न, शॉल और माला भेंट कर किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम उन्नाव रहे। उन्होंने किशोर कुमार के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि संगीत और ग़ज़ल भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत हैं और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
प्रदीप श्रीवास्तव, श्वेता श्रीवास्तव, संजय स्वर्णकार, कपिल शर्मा, मनीषा सिंह राजावत, दुर्गेश, पूजा भदौरिया और योगेश भदौरिया ने अपनी मधुर आवाज़ से महफ़िल को यादगार बना दिया। तबले पर हरीश झा और शुभम वर्मा, पियानो एवं कीबोर्ड पर समीर सचान तथा वायलिन पर देवानंद पाठक ने प्रभावशाली संगत दी।
कलाकारों ने ‘तुम ये कैसे जुदा हो गए’, ‘हमको किसके ग़म ने मारा’, ‘आज जाने की ज़िद न करो’, ‘एक तरफ़ उसका घर, एक तरफ़ मयकदा’ और ‘ये शोहरत भी ले लो’ जैसी लोकप्रिय ग़ज़लों से समां बांध दिया।
कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार, शिक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत की अनेक हस्तियां सपरिवार मौजूद रहीं। गुलशन धूपर, डॉ. ए.एस. प्रसाद, ईश्वर सिंह वर्मा, योगेश दुबे, अजीत ठाकुर, आदेश टंडन, डॉ. जय प्रकाश सहित चैम्बर के सदस्य और शहर के गणमान्य नागरिकों ने सुरमयी शाम का आनंद लिया।




