
माइक्रोफाइनेंस ऋणों की कीमत तय करने की बोर्ड नीति नहीं बनाई, सिंथेटिक सिक्योरिटाइजेशन जैसी गतिविधि पर भी उठे सवाल
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
मुंबई। वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय नियमों की अनदेखी का एक और मामला सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस लिमिटेड पर ₹6.20 लाख का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक की जांच में कंपनी द्वारा माइक्रोफाइनेंस ऋणों की कीमत तय करने और मानक परिसंपत्तियों के सिक्योरिटाइजेशन से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की पुष्टि हुई है।
RBI ने 2 सितंबर 2026 के आदेश में यह कार्रवाई की। कंपनी की वैधानिक जांच 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर की गई थी। जांच के दौरान सामने आई नियामकीय कमियों के बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। RBI ने कंपनी के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई में दिए गए पक्ष पर विचार करने के बाद जुर्माना लगाने का फैसला किया।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, कंपनी ने माइक्रोफाइनेंस ऋणों की कीमत तय करने के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदित नीति ही तैयार नहीं की थी। यह कमी ऐसे क्षेत्र में सामने आई है, जहां छोटे और सीमित आय वाले ग्राहक ऋण की शर्तों और लागत को लेकर वित्तीय संस्थानों पर निर्भर रहते हैं। बोर्ड-अनुमोदित नीति का अभाव ऋण मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी को कमजोर कर सकता है।
दूसरी गंभीर कमी कंपनी की ओर से ‘सिंथेटिक सिक्योरिटाइजेशन’ जैसी गतिविधियों से जुड़ी है। इस तरह की गतिविधियों में जोखिम के वास्तविक हस्तांतरण और वित्तीय दायित्वों की स्थिति को लेकर नियामकीय निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। RBI के निर्देशों से हटकर काम करना वित्तीय व्यवस्था में जोखिम बढ़ाने वाला कदम माना जा सकता है।
हालांकि RBI ने स्पष्ट किया कि जुर्माना किसी ग्राहक के साथ किए गए लेन-देन या समझौते की वैधता पर फैसला नहीं है। कार्रवाई केवल नियामकीय अनुपालन में पाई गई कमियों के आधार पर की गई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया कि भविष्य में कंपनी के खिलाफ अन्य कार्रवाई की संभावना समाप्त नहीं हुई है।
यह मामला वित्तीय संस्थानों की आंतरिक व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। खासकर माइक्रोफाइनेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा का आधार है। RBI की कार्रवाई से स्पष्ट है कि नियामकीय निर्देशों की अनदेखी पर संस्थाओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा।



