हेल्थ

चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में बड़े सुधार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस एक्ट, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश में व्यापार को सुगम बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस), कानूनी जटिलताओं को कम करने और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मेडिकल डिवाइस सेक्टर में ऐतिहासिक विधायी सुधारों की शुरुआत की है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस एक्ट, 2017 में तीन महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव किया है।

इन नए संशोधनों के तहत मुख्य रूप से मेडिकल उपकरणों के स्टरलाइजेशन (शुद्धिकरण) के आउटसोर्सिंग प्रावधानों को बेहद सरल बनाया गया है। अब इसके तहत निर्माताओं को उपकरण के स्तर पर ही लाइसेंस प्राप्त सुविधा का लाइसेंस नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल डिवाइस रूल्स की नौवीं अनुसूची में परीक्षण प्रयोगशालाओं (टेस्टिंग लैब्स) के लिए एकसमान (यूनिफॉर्म) शुल्क का प्रावधान किया गया है, जिससे देश भर की सभी प्रयोगशालाओं में शुल्क को लेकर स्पष्टता आएगी।

सबसे क्रांतिकारी बदलाव नियम 63 में किया गया है, जिसके दायरे में अब यूरोपीय संघ (EU) को भी शामिल कर लिया गया है। अभी तक इस सूची में केवल अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान शामिल थे। यूरोपीय संघ के जुड़ने से अब उन चिकित्सा उपकरणों के लिए भारत में अलग से क्लीनिकल जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी, जिन्हें पहले से ही यूरोपीय संघ की मंजूरी मिल चुकी है। इससे देश में उन्नत मेडिकल टेक्नोलॉजी की सीधी और त्वरित पहुंच आसान होगी, जिससे आयातकों और निर्माताओं का कानूनी बोझ काफी कम होगा।

यह संशोधन देश में चिकित्सा उपकरणों के विधिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि देश के नागरिकों को उच्चतम गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों वाले आधुनिक उपकरण सुलभ हों।

Related Articles

Back to top button