लखनऊ

अदब के चमकते सितारे बशीर बद्र को लखनऊ की नम आंखों से विदाई

यूपी प्रेस क्लब में उमड़ा दिग्गजों का हुजूम, इत्तेहाद-ए-मिल्लत की शोक सभा में याद आए 'अल्फाज के जादूगर'

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उर्दू अदब, मोहब्बत और इंसानी जज्बातों को अपनी शायरी से जीवंत करने वाले मुल्क के अजीम शायर बशीर बद्र की याद में पूरी अदबी नगरी लखनऊ गमगीन है। राजधानी के प्रतिष्ठित यू.पी. प्रेस क्लब में इत्तेहाद-ए-मिल्लत के तत्वावधान में एक अत्यंत भावपूर्ण शोक सभा का आयोजन किया गया। यह महफिल सिर्फ एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि बशीर बद्र साहब द्वारा छोड़ी गई मोहब्बत, सौहार्द और इंसानियत की उस अनमोल विरासत को याद करने का जरिया बनी जिसने दशकों तक करोड़ों दिलों को छुआ। सभा का कुशल संचालन पी.के. तिवारी ने किया, जबकि इसका संयोजन सिराज मेंहदी, इंसराम अली और सर्वेश अस्थाना द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस शोक सभा में लखनऊ के नामचीन शायरों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों और साहित्यकारों ने भारी संख्या में शिरकत की। बशीर बद्र साहब के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए सिराज मेंहदी ने कहा, “बशीर साहब उर्दू अदब की वह बुलंद आवाज़ थे, जिनके अशआर लोगों के दिलों की धड़कन बन गए। उनका जाना साहित्य जगत की एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है।” वहीं इंसराम अली ने दुआ करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समाज को भाईचारे का संदेश दिया, अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।

नम आंखों के बीच गूंजे मशहूर अशआर, 2 मिनट का मौन रख दी श्रद्धांजलि

मशहूर साहित्यकार सर्वेश अस्थाना ने बशीर जी को शब्दों का जादूगर बताते हुए कहा कि उनकी ग़ज़लों में जीवन का दर्द और रिश्तों की गर्माहट साफ झलकती थी।

  • अशआरों से माहौल हुआ गमगीन: शोक सभा के दौरान जब कई समकालीन शायरों ने बशीर बद्र के मशहूर और कालजयी अशआर पढ़े, तो पूरा हॉल बेहद भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
  • मौन रखकर दी विदाई: सभा के अंत में सभी उपस्थित जनों ने 2 मिनट का मौन धारण कर दिवंगत रूह की शांति के लिए प्रार्थना की।

सांस्कृतिक क्षति: वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि बशीर बद्र ने भाषा, मजहब और क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर दिलों को जोड़ने का काम किया। वे भले ही दुनिया से रुखसत हो गए हों, लेकिन उनकी कलम से निकले अल्फाज़ हमेशा अमर रहेंगे।

इस ऐतिहासिक शोक सभा में डॉ. अम्मार रिजवी, सुरेश बहादुर सिंह, अशोक सिंह, मुईद अहमद, प्रो. रमेश दीक्षित, अमीर हैदर, अनीस अंसारी, प्रो. साबिरा हबीब, डॉ. सुमन दुबे, अमीक जमाई, अजीज सिद्दीकी, अब्दुल वहीद, हसन काज़मी, शब्बू कुरैशी, मेंहदी हसन, आसिफ जाफरी, नावेद शिकोह, मिथलेश लखनवी, नदीम अशरफ जायसी, दाऊद अहमद, मो. नासिर, शम्सी आजाद, कमर खान, आफताब अहमद और शहरयार सहित समाज के हर वर्ग के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।

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