गर्मी के चरम पर भी नहीं डगमगाया पावर ग्रिड, सौर-थर्मल के दम पर देश ने दिखाया दम
भारत ने रचा ऊर्जा इतिहास: 256 गीगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग बिना कटौती पूरी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
देश की ऊर्जा क्षमता और प्रबंधन का शानदार उदाहरण पेश करते हुए भारत ने 25 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:38 बजे 256.1 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग को बिना किसी कमी के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। यह उपलब्धि न केवल 30 मई 2024 के 250 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार करती है, बल्कि वित्त वर्ष 2025-26 में 9 जनवरी को दर्ज 245.4 गीगावाट के शिखर को भी पीछे छोड़ देती है।
तेज गर्मी के बीच बिजली की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जहां अप्रैल 2026 (1 से 27 अप्रैल) के दौरान खपत में पिछले साल की तुलना में 8.9% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद देश ने न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा किया, बल्कि पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी जारी रखा—जो भारत की बढ़ती ऊर्जा आत्मनिर्भरता का स्पष्ट संकेत है।
इस उपलब्धि के पीछे बिजली क्षेत्र में रिकॉर्ड 65 गीगावाट की क्षमता वृद्धि का अहम योगदान रहा, जिसने उत्पादन पोर्टफोलियो को मजबूत किया और उच्च मांग से निपटने की तैयारी को बेहतर बनाया। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी मजबूत आधार के चलते भारत इस वर्ष संभावित 270 गीगावाट की मांग को भी आसानी से पूरा कर सकता है।
पूरे देश में मांग को संतुलित करने के लिए राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र (NLDC), क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय लोड डिस्पैच केंद्रों के बीच रियल-टाइम समन्वय सुनिश्चित किया गया। संसाधनों का स्मार्ट प्लानिंग, पारेषण नेटवर्क का कुशल उपयोग और समयबद्ध बिजली आपूर्ति ने इस सफलता को संभव बनाया।
ऊर्जा मिश्रण की बात करें तो थर्मल पावर का सबसे बड़ा योगदान 66.9% रहा, जबकि सौर ऊर्जा ने 21.5% के साथ बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा जलविद्युत, परमाणु, पवन और गैस आधारित स्रोतों ने भी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खास बात यह रही कि ग्रिड आवृत्ति 50 हर्ट्ज पर स्थिर रही, जिससे सिस्टम की मजबूती और विश्वसनीयता साबित हुई।
ऊर्जा क्षेत्र की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत को न केवल आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर भी एक मजबूत और भरोसेमंद शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।



