अस्पतालों में दवाओं की कमी पर आयुष मंत्री नाराज़
निरीक्षण में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ। प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ की समीक्षा बैठक में आयुष अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाएं और दवाओं की कमी बड़ा मुद्दा बनकर सामने आईं। मंत्री ने साफ संकेत दिए कि कई अस्पतालों में मरीजों को समय पर दवाएं नहीं मिल पा रहीं और चिकित्सकों की उपस्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
योजना भवन में आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, देवीपाटन और बरेली मंडल के अधिकारियों से जवाब-तलब करते हुए मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में दवाओं की कमी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन अस्पतालों में दवाओं का अभाव है, वहां तत्काल रिपोर्ट भेजी जाए।
बैठक में यह भी सामने आया कि कई आयुष चिकित्सालयों में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं, जिस पर मंत्री ने नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करना गंभीर लापरवाही है।
डॉ. दयालु ने चिकित्सकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को समुचित उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अस्पतालों में साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ती है।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने, ओपीडी संख्या बढ़ाने और आमजन को आयुष सेवाओं से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही बौद्ध क्षेत्रों में ‘सोवा-रिग्पा’ पद्धति के प्रचार-प्रसार पर जोर देने की बात कही गई।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार, महानिदेशक चैत्रा वी., निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथ डॉ. पी.के. सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



