RBI के नए फॉरेक्स नियमों से छोटे कारोबारियों पर संकट, लाइसेंस और पूंजी शर्तों ने बढ़ाई चिंता
विदेशी मुद्रा कारोबार पर सख्ती का शिकंजा, नए FEMA नियमों से बाजार में मचा असंतोष

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए नए Foreign Exchange Management (Authorised Persons) Regulations, 2026 ने विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े छोटे ऑपरेटरों, फॉरेक्स एजेंसियों और मनी चेंजर सेक्टर में बेचैनी बढ़ा दी है। नए नियमों के तहत लाइसेंस, नेटवर्थ, कारोबार सीमा और “फिट एंड प्रॉपर” शर्तों को इतना कठोर बना दिया गया है कि छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी खुद को बाजार से बाहर होता महसूस कर रहे हैं।
RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति विदेशी मुद्रा कारोबार नहीं कर सकेगा। साथ ही नई FFMC (Full Fledged Money Changer) लाइसेंस प्रक्रिया लगभग बंद करने का संकेत भी दिया गया है। इससे उन कंपनियों को बड़ा झटका माना जा रहा है जो लंबे समय से फॉरेक्स कारोबार में प्रवेश की तैयारी कर रही थीं।
सबसे ज्यादा चिंता छोटे ऑपरेटरों को नेटवर्थ और टर्नओवर की अनिवार्य शर्तों को लेकर है। AD Category-II के लिए न्यूनतम 10 करोड़ रुपये नेटवर्थ और 50 करोड़ रुपये वार्षिक फॉरेक्स कारोबार की शर्त ने बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की आशंका बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि इससे बड़े कॉर्पोरेट और चुनिंदा वित्तीय संस्थानों का दबदबा और मजबूत होगा जबकि छोटे व्यवसाय धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।
नियमों में यह भी कहा गया है कि जिन कंपनियों या उनके निदेशकों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED), DRI या अन्य एजेंसियों की जांच लंबित होगी, उन्हें लाइसेंस मिलने में दिक्कत आ सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की कठोर शर्तें निवेशकों में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा करेंगी।
फ्रेंचाइजी मॉडल को दो वर्षों में समाप्त करने के फैसले ने भी हजारों छोटे एजेंटों की चिंता बढ़ा दी है। अब उन्हें “फॉरेक्स करेस्पोंडेंट” मॉडल में बदलना होगा, जिसके लिए अतिरिक्त अनुपालन और तकनीकी ढांचे की जरूरत पड़ेगी। इससे छोटे शहरों और कस्बों में फॉरेक्स सेवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का उद्देश्य विदेशी मुद्रा कारोबार में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाना है, लेकिन अत्यधिक नियंत्रण से बाजार में प्रतिस्पर्धा घट सकती है। कारोबारी संगठनों ने मांग की है कि छोटे ऑपरेटरों को राहत देने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था लागू की जाए, अन्यथा हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है।



