
– निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
नियमों की धज्जियां उड़ाने पर एक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गोरखपुर स्थित ‘द एन.ई. एंड ई.सी. रेलवे एम्पलाइज मल्टी-स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड’ पर सख्त कार्रवाई की है। आरबीआई ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी करने पर बैंक पर ₹1.05 लाख का भारी मौद्रिक जुर्माना ठोंक दिया है।
लावारिस पैसों की हेराफेरी?
सुपरवाइजरी जांच में बैंक की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। यह बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के नियमों के तहत पात्र लावारिस दावों (Unclaimed Amounts) को तय समय सीमा के भीतर ‘जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष’ (DEAF) में ट्रांसफर करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।
सिबिल डिफ़ॉल्टर्स को छिपाने का खेल!
बैंक की मनमानी यहीं नहीं रुकी। आरबीआई के कड़े निर्देशों के बावजूद, बैंक ने न तो दो क्रेडिट सूचना कंपनियों (CICs) की सदस्यता ली और न ही अपने कर्जदारों (Borrowers) का क्रेडिट डेटा सभी चार CICs को सौंपा। इस लापरवाही से डिफॉल्टर्स की वित्तीय जानकारी छिपने का गंभीर खतरा पैदा हुआ।
नोटिस का खोखला जवाब
आरबीआई ने 31 मार्च, 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक की पोल खोली थी। बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन बैंक द्वारा दिए गए जवाबों और दलीलों से आरबीआई संतुष्ट नहीं हुआ और आरोपों को सही पाते हुए यह दंडात्मक कार्रवाई की।
ग्राहकों के भरोसे को झटका!
आरबीआई की यह कार्रवाई साफ बताती है कि बैंक के भीतर वैधानिक और नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) का स्तर कितना लचर है। हालांकि आरबीआई ने कहा है कि इससे ग्राहकों के लेनदेन पर असर नहीं होगा, लेकिन ऐसी बड़ी लापरवाही बैंक की साख और मैनेजमेंट पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



