वाराणसी

सर्वाइवरों की हुंकार: पुनर्वास दया नहीं, गरिमा और अधिकार का सवाल

‘सर्वाइवर एलायंस मीटिंग–2026’ में न्याय, पुनर्वास और मानवाधिकारों के लिए सामूहिक आवाज बुलंद

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

मानवाधिकार उल्लंघन, यातना, हिंसा, भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न से प्रभावित लोगों की आवाज को मजबूती देने के उद्देश्य से मंगलवार को पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन में ‘सर्वाइवर एलायंस मीटिंग–2026’ का आयोजन हुआ। मानवाधिकार जन निगरानी समिति (PVCHR) एवं जन मित्र न्यास (JMN) ने IRCT और UNVFVT के सहयोग से आयोजित इस बैठक का केंद्रीय विषय “परिवर्तन का नेतृत्व करते सर्वाइवर: पुनर्वास, गरिमा और न्याय” रहा।

न्याय का अर्थ सिर्फ कार्रवाई नहीं

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि न्याय को केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं किया जा सकता। श्रुति नागवंशी ने कहा कि न्याय के दायरे में गरिमा, पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापना और भेदभाव से मुक्ति भी शामिल होनी चाहिए।

पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल

मुख्य अतिथि डॉ. परमेन्द्र सिंह ने लोकतंत्र में जमीनी आंदोलनों की भूमिका को रेखांकित किया। वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने घसिया बस्ती से पलायन, आजीविका संकट और कथित पुलिस उत्पीड़न के प्रसंग सामने रखे। डॉ. लेनिन रघुवंशी ने पुलिस व्यवस्था की ऐतिहासिक संरचना पर सवाल उठाते हुए पुलिस आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की। उन्होंने पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों में सुधार की आवश्यकता भी बताई।

बुनकरों और बंदियों की आवाज

बिहार से आए बंदी अधिकार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय ने अनूप चौधरी और सुशील त्रिपाठी की सामाजिक विरासत को याद किया। बंकट दस्तकार अधिकार मंच के मोहम्मद इदरीस ने बुनकरों की समस्याओं और बिजली दरों को लेकर चल रहे पत्राचार का मुद्दा उठाया।

‘पहचान नहीं, मानवीय गरिमा’

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने स्वर्गीय अनिल चौधरी के संदेश “पहचान नहीं, मानवीय गरिमा” को बैठक की मूल भावना से जोड़ा। स्वर्गीय सुशील त्रिपाठी के सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यों को भी स्मरण किया गया।

सात जनसेवियों को ‘जनमित्र अवार्ड’

सामाजिक सरोकारों और मानवाधिकार क्षेत्र में योगदान के लिए आनंद प्रकाश निषाद, नितिन गुप्ता, राकेश रंजन त्रिपाठी, राजेन्द्र प्रसाद, पुष्पा पाल, अशोक कुमार सिन्हा और इफ्तेखार अहमद को ‘जनमित्र अवार्ड–2026’ से सम्मानित किया गया।

नुक्कड़ नाटक से संदेश

बघवानाला राजा सुहेल देव जनमित्र शिक्षण केंद्र की छात्राओं ने मानवाधिकार एवं सामाजिक जागरूकता पर आधारित प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। सोनभद्र के घसिया आदिवासियों ने कर्मा नृत्य के माध्यम से अपनी पीड़ा और संघर्ष को अभिव्यक्ति दी।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सर्वाइवरों के लिए न्याय, सम्मान, पुनर्वास और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा।

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