सरकार-उद्योग-शिक्षाविद एक मंच पर, यूपी बनेगा मेडिकल रिसर्च का नया हब
यूपी-इमरास से हेल्थ रिसर्च में क्रांति: एक क्लिक पर पारदर्शी और तेज़ अनुसंधान प्रक्रिया

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ में आयोजित यूपी श्रुति (इमरास) कार्यशाला ने स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई दिशा तय कर दी है। संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) के एच.जी. खुराना ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि यूपी-इमरास पहल स्वास्थ्य अनुसंधान में पारदर्शिता, दक्षता और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अनुसंधान प्रक्रियाओं को सरल और तेज़ बनाएगा, जिससे परिणामों का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।
मुख्यमंत्री के सलाहकार जी.एन. सिंह ने नियामकीय समन्वय और नवाचार पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह की पहलें उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल और मेडिकल रिसर्च में अग्रणी बना सकती हैं। वहीं SGPGIMS के निदेशक आर.के. धीमान ने बताया कि मानकीकृत प्रक्रियाएं और डिजिटल टूल्स अनुसंधान की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को नई ऊंचाई देंगे।
कार्यक्रम के दौरान यूपी-इमरास प्लेटफॉर्म का विस्तृत प्रस्तुतीकरण कृतिका शर्मा द्वारा किया गया, जिसमें बताया गया कि यह एक केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम है जो विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा। तकनीकी डेमो के माध्यम से प्रतिभागियों को डिजिटल प्रस्ताव जमा करने, डेटा प्रबंधन और नियामकीय एकीकरण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इंटरएक्टिव सत्र रहा, जहां विशेषज्ञों ने 22 मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) पर विस्तार से चर्चा की। इन SOPs का उद्देश्य अनुसंधान प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना और गुणवत्ता में सुधार करना है।
कुल मिलाकर, यूपी श्रुति (इमरास) पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह पहल न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी, बल्कि राज्य को मेडिकल रिसर्च के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।



