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IIP ग्रोथ सुस्त: मार्च में 4.1% पर थमी रफ्तार, कई सेक्टरों में गिरावट के संकेत

मैन्युफैक्चरिंग का दम भी कमजोर, उपभोक्ता मांग में सुस्ती से उद्योग पर दबाव

(निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क)

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने औद्योगिक क्षेत्र की चमक पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की वृद्धि दर 4.1% रही, जो फरवरी 2026 के 5.2% के मुकाबले धीमी पड़ती नजर आई। यह गिरावट संकेत देती है कि देश की औद्योगिक गति उतनी मजबूत नहीं है, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

हालांकि खनन (5.5%) और विनिर्माण (4.3%) में कुछ वृद्धि दर्ज हुई, लेकिन बिजली क्षेत्र की बेहद कमजोर 0.8% वृद्धि चिंता बढ़ाने वाली है। यह साफ दिखाता है कि ऊर्जा खपत और औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं है। खासतौर पर उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में मात्र 1.1% वृद्धि से मांग में सुस्ती का संकेत मिलता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

विनिर्माण सेक्टर के भीतर भी तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। 23 उद्योग समूहों में से केवल 14 ने ही वृद्धि दर्ज की, जबकि कई क्षेत्रों में गिरावट देखी गई। परिधान (-14.6%), तंबाकू (-10%) और इलेक्ट्रॉनिक्स (-8.2%) जैसे सेक्टरों में गिरावट ने औद्योगिक मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि मोटर वाहन (18.1%) और मशीनरी (11.2%) जैसे कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन यह वृद्धि समग्र गिरावट को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं दिखती। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपभोक्ता मांग और निवेश में तेजी नहीं आई, तो आने वाले महीनों में औद्योगिक विकास और कमजोर पड़ सकता है।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण में पूंजीगत वस्तुओं में 14.6% की वृद्धि जरूर सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन यह भी संकेत हो सकता है कि उत्पादन क्षमता बढ़ रही है, जबकि मांग उतनी तेज नहीं है। ऐसे में उत्पादन और खपत के बीच असंतुलन की स्थिति बन सकती है।

कुल मिलाकर, मार्च 2026 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र फिलहाल मिश्रित संकेत दे रहा है, जहां कुछ क्षेत्रों की मजबूती के बावजूद समग्र रफ्तार पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

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