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ममता बनर्जी की डॉक्टरों के साथ बैठक पर विवाद

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सोमवार को 675 सीनियर और जूनियर डॉक्टरों के साथ होने वाली बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विवाद इस बात पर है कि इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों की बैठक में भागीदारी से राज्य के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में रोगी देखभाल सेवाओं पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं।

इस बैठक को “डॉक्टरों का सम्मेलन’ और “चिकित्सा सेवा ही मानव सेवा है’ नाम दिया गया है, जिसमें राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के डॉक्टर शामिल होंगे। राज्य स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओएच) को अपने अधीनस्थ “संकाय, छात्र, रेजिडेंट डॉक्टर और चिकित्सा अधिकारियों’ को बैठक के लिए नामित करने को कहा गया है। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम द्वारा जारी निर्देश में कहा गया कि यह नामांकन तभी किया जाए जब यह सुनिश्चित हो कि रोगी देखभाल सेवाएं प्रभावित न हों। हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि इतने डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में जिलों की स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से कैसे संचालित होंगी। यह बैठक कोलकाता में एक सरकारी ऑडिटोरियम में सुबह 11.30 बजे से शुरू होगी।

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा, “जब 675 डॉक्टरों को सम्मेलन में भाग लेने का निर्देश दिया गया है, तो मरीजों की देखभाल प्रभावित कैसे नहीं होगी?” उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि “क्या यह सम्मेलन वास्तव में एक राजनीतिक भाषण का मंच है?” शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह सम्मेलन “राज्य सरकार के वेतनभोगी डॉक्टरों पर नियंत्रण दिखाने का प्रयास है।’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई जघन्य घटना के बाद डॉक्टरों ने राज्यव्यापी आंदोलन किया था और स्वास्थ्य प्रणाली की खामियों को उजागर किया था। अधिकारी के अनुसार, ‘इस सम्मेलन के जरिए सरकार डॉक्टरों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।’

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