बिज़नेस

केवाईसी नियमों की अनदेखी पड़ी भारी!

नियामकीय ढिलाई पर केंद्रीय बैंक का कड़ा संदेश

आरबीआई का मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस पर शिकंजा, अनुपालन में लापरवाही उजागर

हर छह महीने की जोखिम समीक्षा तक नहीं हुई

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्तीय क्षेत्र में नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के खिलाफ अपनी सख्त नीति को एक बार फिर दोहराते हुए मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड पर ₹2.70 लाख का मौद्रिक दंड लगाया है। केंद्रीय बैंक की यह कार्रवाई बताती है कि केवाईसी (Know Your Customer) नियमों में जरा-सी लापरवाही भी अब भारी पड़ सकती है।

आरबीआई की जांच में सामने आया कि कंपनी ग्राहकों के खातों की जोखिम श्रेणी (Risk Categorisation) की कम-से-कम प्रत्येक छह महीने में अनिवार्य समीक्षा करने की प्रभावी व्यवस्था स्थापित करने में विफल रही। यह कमी केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

यह कार्रवाई 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति के आधार पर किए गए वैधानिक निरीक्षण के बाद सामने आई अनियमितताओं पर आधारित है। निरीक्षण में नियामकीय उल्लंघन पाए जाने के बाद आरबीआई ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी के लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई में प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद केंद्रीय बैंक ने आरोपों को सही पाया और दंड लगाने का निर्णय लिया।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह दंड केवल नियामकीय अनुपालन में पाई गई कमियों के कारण लगाया गया है। इसका उद्देश्य कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी वित्तीय लेनदेन की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में आवश्यक समझे जाने पर कंपनी के विरुद्ध अन्य नियामकीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि जोखिम वर्गीकरण की नियमित समीक्षा धन शोधन, धोखाधड़ी और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने की बुनियादी शर्त है। ऐसे मामलों में ढिलाई न केवल संस्थान की साख को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा सकती है।

आरबीआई की यह कार्रवाई देश की सभी एनबीएफसी कंपनियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि अनुपालन में लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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