समावेशी शिक्षा की नई मिसाल: शकुन्तला विश्वविद्यालय बना दिव्यांग छात्रों का सशक्त केंद्र
रैम्प से रिसर्च तक सुविधाओं का विस्तार, उच्च शिक्षा में दिव्यांगों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ में स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने दिव्यांग विद्यार्थियों के समग्र विकास को केंद्र में रखकर शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत पहल की है। विश्वविद्यालय परिसर को पूरी तरह दिव्यांग-अनुकूल बनाने के लिए रैम्प, लिफ्ट, ब्रेल संकेत, सुलभ शौचालय, सहायक उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन जैसी सुविधाओं को तेजी से विकसित किया जा रहा है।
इस दिशा में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने आजमगढ़ के विकास भवन में आयोजित एक अहम बैठक में स्पष्ट किया कि संस्थान का उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि दिव्यांग विद्यार्थियों को शैक्षिक, सामाजिक और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल और सहयोगी वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे हर छात्र को समान अवसर मिल सके।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों की शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की पहल को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने सुझाव दिया कि जिला स्तर पर एक समन्वित तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और कौशल विकास विभाग मिलकर काम करें। इससे दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा से लेकर रोजगार तक निरंतर सहयोग मिल सकेगा।
डिजिटल माध्यमों पर भी खास जोर दिया गया, जिसमें ऑनलाइन काउंसलिंग, ई-लर्निंग सामग्री और सुलभ सूचना प्रणाली विकसित करने की बात सामने आई। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि काउंसलिंग और मार्गदर्शन तंत्र को मजबूत कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र छात्र संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाए।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने मिलकर उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने और नामांकन बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की।
कुल मिलाकर, यह पहल न केवल दिव्यांग छात्रों के लिए अवसरों का विस्तार करेगी, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में समानता और समावेश का एक मजबूत उदाहरण भी पेश करेगी।



