उत्तर प्रदेश

‘ज़ीरो टॉलरेंस’ के मुंह पर कालिख! आयुष विभाग में तबादलों के नाम पर करोड़ों का घपला

पैसे भी डूबे और कुर्सी भी छूटी, पीड़ित पहुंचे 'भांजे श्री' के द्वार!

महानिदेशक बनाम प्रमुख सचिव: लखनऊ ब्यूरोक्रेसी में छिड़ा महा-संग्राम, रिटायर्ड मठाधीश की खुली धमकी—”पैसा वापस मांगा तो और बुरी तरह रगड़ दिए जाओगे!”

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
⚠️ लखनऊ ब्यूरोक्रेसी महा-संग्राम: आयुष विभाग का ‘घूसकांड’ ⚠️

              【 दरबार-ए-रसूख 】  🎪 मंत्री जी के 'भांजे श्री' का वरदहस्त (सानिध्य)
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               │     रिटायर्ड मठाधीश      │   💸 [मलाईदार ट्रांसफर लिस्ट]
               │  (इकबाल अहमद सिद्दीकी)   ├──►   [लाखों की वसूली!]
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                            │ 📢 खुली धमकी:
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                 "पैसा वापस मांगा तो...
            और बुरी तरह रगड़ दिए जाओगे!"
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    ⚔️ 【 कुर्सी की भीषण जंग 】 │
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     ▼ (बगावत का बिगुल!)                                            ▼ (रहस्यमयी चुप्पी)

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│ महानिदेशक │ ◄━━━━━━━━━━━━ 🔥 विवाद 🔥 ━━━━━━━━━━━► │ प्रमुख सचिव │
│ (चौत्रा वी) │ │ (रंजन कुमार) │
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│ 📜 शिकायती पत्र: “तबादला नीति की उड़ी धज्जियां, निरस्त करो!”

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│ मुख्य सचिव की चौखट (लखनऊ) │
│ 🚨 “पैसा भी डूबा, कुर्सी भी छूटी… यूनानी विंग में हाहाकार!” │
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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ दावों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए आयुष विभाग में ‘सिस्टम लूट’ का एक ऐसा खौफनाक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है, जिसने पूरी सरकार की साख को वेंटिलेटर पर ला दिया है। विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का एकतरफा माल पार किया गया है। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब यह मलाईदार सिंडिकेट आपसी लड़ाई के कारण चौराहे पर आ गया। सबसे बड़ा धमाका आयुष विभाग के यूनानी विंग में हुआ है, जहां सबसे ज्यादा तबादले किए गए और सबसे मोटी रकम वसूली गई। अब हालात ये हैं कि जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मलाईदार पोस्टिंग के लिए अपनी जीवनभर की कमाई लुटा दी थी, वे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। उनका पैसा भी चला गया और महानिदेशक की बगावत के कारण तबादला भी अधर में लटक गया है।

महानिदेशक ने खोला मोर्चा, मुख्य सचिव की चौखट पर पहुंची गूंज इस महा-घोटाले और बंदरबांट के खिलाफ विभाग की महानिदेशक चैत्रा वी. ने सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। महानिदेशक ने हाल ही में जारी हुए समूह ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को सरेआम अवैध बताते हुए उन्हें तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका गंभीर आरोप है कि स्थानांतरण नीति 2026-27 की धज्जियां उड़ाते हुए आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी निदेशालयों ने उनके बिना किसी अनुमोदन और हस्ताक्षर के ही पिछले दरवाजे से लिस्ट जारी कर दी। विभाग में चर्चा है कि जहां चहेते और मठाधीश अफसर दस-दस साल से एक ही मलाईदार सीट पर कुंडली मारकर बैठे हैं, वहीं पैसे न दे पाने वाले ईमानदार कर्मचारियों का एक साल के भीतर ही दोबारा तबादला कर दिया गया।

‘भांजे श्री’ का दरबार और रिटायर्ड मठाधीश की गुंडागर्दी इस पूरी लूट का सबसे मसालेदार और घिनौना पहलू अब सामने आया है। पीड़ित डॉक्टर और कर्मचारी अब अपना पैसा वापस मांगने के लिए मंत्री जी के रसूखदार ‘भांजे श्री’ के दरबार के चक्कर काट रहे हैं, जिनके सानिध्य में यह पूरा खेल रचा गया था। लेकिन वहाँ न्याय मिलने के बजाय उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। विभाग में सालों से जमे रिटायर्ड मठाधीश इकबाल अहमद सिद्दीकी, जो रिटायर होने के बाद भी पूरे ट्रांसफर रैकेट का रिमोट कंट्रोल थामे हुए हैं, सभी पीड़ितों को खुली धमकी दे रहे हैं। सिद्दीकी ने साफ कह दिया है, “घबराओ मत, पैसा वापस नहीं होगा। इस बार काम नहीं हुआ तो अगली लिस्ट में एडजस्ट कर दिया जाएगा। लेकिन अगर ज्यादा दबाव बनाया या चूं-चपां की, तो पैसा भी डूबेगा और ऐसी जगह ट्रांसफर करके रगड़ दिए जाओगे कि पूरी नौकरी रोते हुए कटेगी!”

इस खौफनाक माहौल के बीच प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है, जिससे साफ पता चलता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। वहीं निदेशालय के छोटे अफसर 15 मार्च 2014 के एक पुराने शासनादेश की आड़ में अपनी चमड़ी बचाने में जुटे हैं। अफसरों, भांजों और रिटायर्ड मठाधीशों की इस नूराकुश्ती ने यह साबित कर दिया है कि आयुष विभाग में जनता की सेहत से ज्यादा अफसरों की जेब भरने का धंधा फल-फूल रहा है।

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