सर्वोच्च न्यायालय के बहाने अपनों को ही तबाह कर रही अफसरशाही; न मिला पुनर्वास, न मुआवजा, भुखमरी की कगार पर पहुंचे व्यापारी
मेरठ में उजड़ रहे गरीबों के आशियाने! 'बुलडोजर नीति' के खौफ में जी रही माता-बहनें, बीजेपी नेता शारदा ने खुद खोली सिस्टम की पोल!

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क
: उत्तर प्रदेश में गरीबों और व्यापारियों के संरक्षण के दावों की जमीनी हकीकत मेरठ से आई इस डरावनी खबर से पूरी तरह बेनकाब हो गई है। मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट (सेक्टर-2, 3 और 4) में सिस्टम की बेरहमी और अफसरशाही के चलते सैकड़ों छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवार आज बर्बादी और भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि खुद भारतीय जनता पार्टी व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विनीत अग्रवाल शारदा को अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रोते हुए पत्र लिखकर न्याय की भीख मांगनी पड़ी है।
राखी बांधकर रोईं माता-बहनें, बच्चों की पढ़ाई ठप! शारदा के कार्यालय पर जब भारी संख्या में माता-बहनें बदहवास हालत में पहुंचीं, तो वहां का माहौल चीखों और आंसुओं से भर गया। महिलाओं ने रोते हुए बीजेपी नेता के हाथ पर राखी का धागा बांधा और कहा कि हमारी यह राखी प्रदेश के मुखिया तक पहुंचाकर हमारे सुहाग और बच्चों को उजड़ने से बचा लीजिए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास के जिन 22 छोटे व्यापारियों की दुकानें बेरहमी से ध्वस्त कर दी गईं, वे परिवार आज पाई-पाई को मोहताज हैं।
छोटे-छोटे मकानों और दुकानों में रहने वाले सैकड़ों लोग आज खौफ और गहरे मानसिक अवसाद के साए में जी रहे हैं। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि बच्चों के स्कूलों की फीस तक जमा नहीं हो पा रही है और बुजुर्ग माता-पिता बिना इलाज के तड़पने को मजबूर हैं। यह सरकार की घोर संवेदनहीनता है कि महीनों बीत जाने के बाद भी इन बेघर हुए लोगों को कोई समुचित राहत नहीं मिली है। यदि मुख्यमंत्री ने इस मानवीय संकट पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो मेरठ का यह व्यापारिक हब पूरी तरह श्मशान में तब्दील हो जाएगा।



