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सब-सहारा अफ्रीका कंगाल: 26% घट गई विदेशी मदद, मंडराया महासंकट

सब-सहारा अफ्रीका कंगाल: 26% घट गई विदेशी मदद, मंडराया महासंकट!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि साल 2025 में सब-सहारा अफ्रीका को मिलने वाली द्विपक्षीय सहायता में रिकॉर्ड 26 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। आईएमएफ के मुताबिक, डोनर देशों के बजट में कटौती और बदलती भू-आर्थिक प्राथमिकताओं के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। लगातार छह वर्षों के आर्थिक झटकों ने पहले ही इस क्षेत्र की कमर तोड़ दी थी। अब स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय सहायता के लिए मिलने वाला फंड रुकने से कम आय वाले और कमजोर देश भुखमरी और कंगाली के कगार पर पहुंच गए हैं। सरकारों के सामने सीमित वित्तीय संसाधनों, बढ़ते कर्ज और कम विदेशी मुद्रा भंडार के बीच जनता को बचाने की कठिन चुनौती है।

वैश्वीकरण का क्रूर सच: बर्बाद हुए मैन्युफैक्चरिंग हब, बढ़ा आर्थिक राष्ट्रवाद!

हार्वर्ड के अर्थशास्त्री गॉर्डन हैनसन का दावा है कि वैश्वीकरण (Globalization) के कारण अमीर देशों के मध्यम और कम आय वाले कर्मचारी पूरी तरह तबाह हो गए हैं। अर्थशास्त्रियों ने चीन और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बढ़ते आयात के क्षेत्रीय प्रभावों को भांपने में भारी गलती की। इसके कारण औद्योगिक विशेषज्ञता वाले क्षेत्र पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। पारंपरिक नीतियां, जैसे मुक्त बाजार के भरोसे छोड़ना या टैरिफ लगाना, इस क्षेत्रीय गिरावट को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अब संकटग्रस्त समुदायों में सीधे मानव और भौतिक पूंजी के निवेश (प्लेस-बेस्ड पॉलिसी) की सख्त जरूरत है, अन्यथा आर्थिक लोकलुभावनवाद और बढ़ेगा।

भू-राजनीतिक टकराव: आर्थिक हथियारों की सनक और भारी तबाही!

जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, देश एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए प्रतिबंध, टैरिफ और निर्यात प्रतिबंध जैसे आर्थिक हथियारों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी फ्राइडेन ने आईएमएफ पॉडकास्ट में चेतावनी दी है कि जब आर्थिक और भू-राजनीतिक संबंध आपस में उलझते हैं, तो परिणाम बेहद विनाशकारी होते हैं। इन प्रतिबंधों की बड़ी कीमत न सिर्फ प्रभावित देशों को बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ रही है।

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