बिज़नेस

बाहरी झटकों और महंगाई के बारूद पर बैठी अर्थव्यवस्था

आरबीआई की 'फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट' में छिपे बड़े खतरे:

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क]

ग्लोबल स्टेबिलिटी पर मंडराया संकट! रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी जून 2026 की ‘फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट’ (FSR) भले ही ऊपर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही हो, लेकिन इसके भीतर देश और दुनिया के लिए गंभीर आर्थिक चेतावनी छिपी है। रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि वैश्विक वित्तीय स्थिरता को लेकर जोखिम अभी भी बहुत ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते बाजार में जो भारी उतार-चढ़ाव शुरू हुआ था, उसने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है।

महंगाई का नया बम और कर्ज का जाल

  • सप्लाई चेन में अनिश्चितता: केंद्रीय बैंक ने माना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में जारी लगातार अनिश्चितता किसी भी समय वित्तीय स्थितियों को बदतर बना सकती है। इससे देश में महंगाई का एक और भयानक दौर (Inflationary Pressures) वापस लौट सकता है।
  • पब्लिक डेट का बढ़ता बोझ: रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में बढ़ता सार्वजनिक कर्ज (Elevated Public Debt), बॉन्ड मार्केट की कमियां, और अत्यधिक बढ़े हुए एसेट वैल्यूएशन (Stretched Asset Valuations) ऐसे बड़े वित्तीय छेद हैं, जो किसी भी अगले बड़े झटके को कई गुना विनाशकारी बना देंगे।

लोन के चक्रव्यूह में डूबे NBFCs आरबीआई भले ही बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की बैलेंस शीट को मजबूत बता रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि हाई-लेवरेज्ड (भारी कर्ज वाली) NBFIs अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई हैं। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट के काल्पनिक ‘एडवर्स सिनेरियो’ (प्रतिकूल हालात) खुद यह साबित करते हैं कि बैंकिंग सिस्टम पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरकार द्वारा विदेशी पूंजी जुटाने के लिए किए जा रहे तात्कालिक नीतिगत उपाय (Capital Inflows Measures) यह साफ करते हैं कि घरेलू बाजार में अंदरूनी तौर पर सब कुछ ठीक नहीं है।

Related Articles

Back to top button