NBFCs और HFCs के लिए लाइसेंस सरेंडर करने के नियम बदले, सिर्फ अर्जी देने से नहीं मिलेगा पीछा
RBI का कड़ा रुख

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लाइसेंस सरेंडर करने के नियम अब और सख्त! नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) द्वारा अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) स्वेच्छा से वापस करने की प्रक्रिया को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक नया और सख्त आदेश जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया है कि 29 अप्रैल 2026 को अनरजिस्टर्ड टाइप-I NBFCs के संबंध में जारी नए संशोधनों के बाद, अब आवेदन फॉर्म और चेकलिस्ट को पूरी तरह बदल दिया गया है।
‘प्रवाह’ पोर्टल पर ही होगा आवेदन, लेकिन शर्तें लागू
- नया डिजिटल रूट: अब किसी भी कंपनी को अपना लाइसेंस सरेंडर करने के लिए संशोधित फॉर्म और जरूरी दस्तावेजों के साथ केवल ‘PRAVAAH’ पोर्टल के माध्यम से ही ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
- अधूरी जानकारी पर रिजेक्शन: चेकलिस्ट के मुताबिक अगर दस्तावेज 100% पूरे नहीं पाए गए, तो आवेदन को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा।
गलतफहमी में न रहें कंपनियां, नियमों का पालन है जरूरी! चीफ जनरल मैनेजर ब्रिज राज द्वारा जारी इस आदेश में कंपनियों को सख्त चेतावनी दी गई है। आरबीआई ने साफ कहा है कि कोई भी कंपनी इस गलतफहमी में न रहे कि सिर्फ आवेदन जमा करने से उसका लाइसेंस रद्द मान लिया जाएगा। जब तक रिज़र्व बैंक खुद कागजी जांच पूरी करके अंतिम फैसला (कंसिलेशन लेटर) कंपनी को नहीं भेज देता, तब तक उस NBFC/HFC को आरबीआई और नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) के सभी कड़े नियमों, गाइडलाइंस और रेगुलेटरी रिटर्न को पहले की तरह ही हर हाल में भरना होगा। नियमों की अनदेखी पर भारी जुर्माना लग सकता है।



