खेती-किसानी

आईसीएआर-सीआईएसएच की तकनीकों का राष्ट्रीय मंच पर डंका

98वें स्थापना दिवस पर लखनऊ संस्थान की उपलब्धियों को मिली बड़ी पहचान

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस समारोह में आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ की अभिनव तकनीकों और अनुसंधान उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान मिला। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक ने अपनी प्रस्तुति में संस्थान की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को देश के कृषि नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

समुद्री मार्ग से आम निर्यात में क्रांति

समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि रही आम के समुद्री निर्यात (Sea Route Export Protocol) की तकनीक, जिसने भारतीय आम के निर्यात की लागत में ऐतिहासिक कमी ला दी है। पहले जहां हवाई मार्ग से निर्यात पर लगभग ₹225 प्रति किलोग्राम खर्च आता था, वहीं नई तकनीक से यह लागत घटकर मात्र ₹15 प्रति किलोग्राम रह गई है। इस नवाचार के जरिए भारतीय आम का सफलतापूर्वक सिंगापुर तक समुद्री निर्यात संभव हुआ है, जिससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कई गुना बढ़ी है।

नई तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण

कार्यक्रम में सीआईएसएच द्वारा विकसित मैंगो बैगिंग (थैला बंदी) तथा मेंटवॉश तकनीक के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) का विमोचन किया गया। ये तकनीकें फलों की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ बढ़ाने में प्रभावी हैं तथा इनका हस्तांतरण मेटा एग्रीटेक को किया गया।

‘अवध अभय’ और ‘अवध समृद्धि’ को मिलेगा विस्तार

संस्थान की विकसित पर्यावरण-अनुकूल आम की उन्नत किस्में ‘अवध अभय’ और ‘अवध समृद्धि’ अब देश के अन्य राज्यों तक पहुंचेंगी। इनकी नर्सरी तकनीक का हस्तांतरण पश्चिम बंगाल में किया गया है, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली पौध उपलब्ध होगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

कीट प्रबंधन में भी बड़ा नवाचार

आईसीएआर-सीआईएसएच ने फ्रूट फ्लाई इंसेक्ट ट्रैप और ग्लो ट्रैप जैसी आधुनिक तकनीकों का भी विमोचन किया। ये पर्यावरण-अनुकूल उपकरण फलों की फसल में कीट नियंत्रण को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाएंगे, जिससे रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम होगी।

किसानों और निर्यातकों के लिए नई उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीएआर-सीआईएसएच की इन तकनीकों को मिली राष्ट्रीय पहचान भारतीय बागवानी अनुसंधान की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। ये नवाचार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि-आधारित उद्योगों को मजबूती देने और भारतीय फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

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