जूनोटिक रोगों पर यूपी सरकार का बड़ा अभियान
75 जिलों में तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स, रोग निगरानी होगी और मजबूत

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश में पशुजन्य (जूनोटिक) रोगों की रोकथाम और समयबद्ध निगरानी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (Training of Trainers – TOT) कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राजधानी लखनऊ में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रदेश के 36 जनपदों से आए सरकारी पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं।
रोगों की समय पर पहचान पर जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि संभावित एवं संदिग्ध मामलों की समय पर रिपोर्टिंग ही बड़े प्रकोपों को रोकने की सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने रोग निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
हर जिले में तैयार होंगे विशेषज्ञ
प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में पशु चिकित्सकों एवं पैरा-वेटरिनरी कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। विभाग का लक्ष्य दोनों चरणों के प्रशिक्षण के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जनपदों के लिए 150 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना है। दूसरे चरण का प्रशिक्षण 16-17 जुलाई को आयोजित किया जाएगा।
खतरनाक पशुजन्य रोगों पर विशेष प्रशिक्षण
प्रतिभागियों को रेबीज, एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI), जापानी इंसेफेलाइटिस, एन्थ्रेक्स, ब्रूसेलोसिस, लम्पी स्किन डिजीज, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस, सीसीएचएफ सहित कई महत्वपूर्ण रोगों की पहचान, रोकथाम, नियंत्रण, प्रयोगशाला जांच, जैव सुरक्षा और सुरक्षित नमूना प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
‘वन हेल्थ’ मॉडल को मिलेगा बल
आईवीआरआई, बरेली तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के विशेषज्ञों की भागीदारी से आयोजित यह कार्यक्रम राज्य में वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण को मजबूत करेगा। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित मानव संसाधन के माध्यम से पशुओं और मनुष्यों दोनों के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।



