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समुद्री सुरक्षा में भारत का ऐतिहासिक कदम

भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल के तहत पहली संप्रभुता-समर्थित P&I बीमा पॉलिसी लॉन्च

भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल के तहत पहली संप्रभुता-समर्थित P&I बीमा पॉलिसी लॉन्च

युद्ध जोखिम प्रीमियम में 40% तक गिरावट, समुद्री व्यापार को मिली नई सुरक्षा

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क

भारत ने समुद्री बीमा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMIP) के अंतर्गत देश का पहला संप्रभुता-समर्थित प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (Protection & Indemnity – P&I) बीमा उत्पाद लॉन्च कर दिया है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की इस पहल से भारतीय समुद्री व्यापार को वैश्विक संकटों के बीच मजबूत सुरक्षा कवच मिलने जा रहा है।

समुद्री व्यापार को मिला मजबूत कवच

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत करते हुए पहला P&I बीमा दस्तावेज भारतीय नौवहन निगम (SCI) को सौंपा। यह बीमा चालक दल की सुरक्षा, मालवाहक दायित्व, प्रदूषण से होने वाले नुकसान, जहाज के मलबे को हटाने तथा अन्य तृतीय पक्ष दायित्वों के लिए 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक की क्षतिपूर्ति सुरक्षा प्रदान करेगा।

युद्ध जोखिम में बड़ी राहत

12 मई 2026 को BMIP के संचालन शुरू होने के बाद इसका असर तुरंत दिखाई दिया। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान जहां युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, वहीं BMIP लागू होने के बाद इन दरों में 35 से 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। यह भारतीय जहाजरानी उद्योग के लिए बड़ी आर्थिक राहत मानी जा रही है।

1608 पॉलिसियों का भरोसा

29 जुलाई 2026 तक BMIP के तहत कार्गो वॉर रिस्क और हल वॉर रिस्क को कवर करने वाली 1,608 बीमा पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय शिपिंग कंपनियों और व्यापार जगत ने इस नई व्यवस्था पर भरोसा जताया है।

आत्मनिर्भर भारत को नई ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल विदेशी बीमा बाजारों पर निर्भरता घटाने, घरेलू अंडरराइटिंग क्षमता बढ़ाने तथा भारत को वैश्विक समुद्री बीमा बाजार में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। BMIP न केवल समुद्री जोखिम प्रबंधन को सशक्त करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बीमा क्षेत्र से जुड़ी पूंजी को देश के भीतर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भविष्य की समुद्री अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स और ब्लू इकॉनमी में नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा। बीमा क्षेत्र में यह आत्मनिर्भर मॉडल आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है।

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