बाघ संरक्षण का जनआंदोलन बना अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश

वन विभाग और कामाकाजी फाउंडेशन ने मिलकर जगाई पर्यावरण चेतना
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस-2026 के अवसर पर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आयोजित कार्यक्रम ने वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का सशक्त संदेश दिया। वन विभाग और कामाकाजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों, पर्यावरण प्रेमियों, बाघ मित्रों और स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता कर बाघ संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाने का संकल्प दोहराया।
बाघ सुरक्षित तो जंगल सुरक्षित
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीएफओ पीपी सिंह, फील्ड डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे वन तंत्र के स्वास्थ्य का प्रतीक है। यदि बाघ सुरक्षित हैं तो जंगल सुरक्षित हैं और यदि जंगल सुरक्षित हैं तो मानव जीवन का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।

जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत
कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदाय, वन कर्मियों और “बाघ मित्रों” के सहयोग से नई मजबूती मिली है। लोगों को प्रकृति संरक्षण और जैव विविधता के महत्व से जोड़ने के लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण का साझा संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। बाघ संरक्षण के माध्यम से जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
सम्मानित हुए बाघ मित्र
इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बाघ मित्रों को सम्मानित किया तथा उन्हें आवश्यक किट और संयुक्त संरक्षण प्रयासों के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सामूहिक प्रयासों से मजबूत होगा संरक्षण अभियान
कार्यक्रम में कामाकाजी फाउंडेशन के मुख्य ट्रस्टी फरहान, निदेशक अंकित श्रीवास्तव, सफदर असलम, मनीष मेहरोत्रा, नीरज पाहुजा सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय नागरिक एवं पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे। आयोजन ने यह संदेश दिया कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की साझेदारी ही भारत की जैव विविधता को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।




