समावेशी शिक्षा का राष्ट्रीय मॉडल बना शकुन्तला विश्वविद्यालय
13वें दीक्षांत समारोह में 1,921 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां

130 मेधावियों को 156 पदक, दिव्यांग छात्रों ने रचा उत्कृष्टता का नया इतिहास
राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने विश्वविद्यालय को ‘स्पेशल स्टेटस’ देने की उठाई मांग
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

लखनऊ, 31 जुलाई। समावेशी शिक्षा, सामाजिक न्याय और दिव्यांग सशक्तिकरण का राष्ट्रीय प्रतीक बन चुके डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह ने शुक्रवार को उपलब्धियों का नया इतिहास रच दिया। विश्वविद्यालय के अटल प्रेक्षागृह में आयोजित गरिमामय समारोह में 1,921 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदकों से सम्मानित किया गया। पदक ग्रहण करते ही विद्यार्थियों के चेहरों पर सफलता की मुस्कान बिखर गई और पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा।
दिव्यांग प्रतिभाओं ने लिखी प्रेरणा की नई इबारत
इस वर्ष 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 45 पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। इनमें 22 स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक शामिल रहे। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का जीवंत प्रमाण बनी।

मुख्य अतिथि की बड़ी मांग
मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली, पुनर्वास मॉडल और दिव्यांग अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए केंद्र सरकार से इसे ‘स्पेशल स्टेटस’ प्रदान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालय अनुसंधान, पुनर्वास, सहायक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित करेगा तथा भारत समावेशी शिक्षा का विश्व नेतृत्व कर सकेगा।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने पर गौरव
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. बोबडे ने विश्वविद्यालय को भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ घोषित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘सुगंध पथ’ योजना, दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए एआई आधारित स्मार्ट विजन चश्मे, लैपटॉप आधारित स्क्राइब-फ्री परीक्षा प्रणाली तथा कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र की उपलब्धियों को देश के लिए अनुकरणीय बताया।
उत्तर प्रदेश बना मिसाल
दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है जहां दिव्यांगजनों के लिए दो विशेष विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को 13 लाख रुपये से अधिक के पैकेज पर रोजगार मिल रहे हैं और खेलों में भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल हो रही हैं।
ज्ञान के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश
कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि संवेदनशील, आत्मनिर्भर और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है। समारोह में डिजिलॉकर के माध्यम से डिग्रियों का डिजिटल वितरण भी किया गया तथा सांकेतिक भाषा के जरिए पूरे कार्यक्रम का समानांतर प्रस्तुतीकरण कर समावेशी शिक्षा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया।




