मत्स्य पालकों के लिए सुनहरी लहर: ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के द्वार खुले

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश के मत्स्य पालकों और पारंपरिक मछुआरा समुदायों के लिए आर्थिक स्वावलंबन का एक सुनहरा अवसर सामने आया है। मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने घोषणा की है कि ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ (PMMSY) के अंतर्गत विभिन्न लाभकारी परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह योजना अब सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जिससे राज्य के मत्स्य उत्पादकों को आधुनिक तकनीक और सरकारी मदद का सीधा लाभ मिल सकेगा।
पात्र और इच्छुक लाभार्थी 14 अगस्त से 24 अगस्त 2026 तक विभागीय पोर्टल http://fisheries.up.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन दर्ज कर सकते हैं।
योजना के तहत मिलने वाले प्रमुख अवसर: सरकार ने जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ छह विशेष परियोजनाओं के लिए आवेदन मांगे हैं:
- तालाब निर्माण: बड़े क्षेत्र (33.93 हेक्टेयर) में तालाब निर्माण और निवेश (सामान्य, महिला व SC वर्ग के लिए)।
- आधुनिक तकनीक: मध्य आकार की आरएएस (RAS) की 03 यूनिट (सामान्य वर्ग) और बैकयार्ड आरएएस की 241 यूनिट (महिला वर्ग)।
- रियरिंग यूनिट: 22.667 हेक्टेयर में रियरिंग यूनिट का निर्माण (महिला व SC वर्ग)।
- मत्स्य बीज संचय: जलाशयों में 65,000 मत्स्य अंगुलिका (फिंगरलिंग) संचय।
- आजीविका सहायता: पारंपरिक मछुआरा परिवारों के पोषण और आजीविका के लिए 500 यूनिट की विशेष सहायता।
आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम: डॉ. निषाद ने जोर देते हुए कहा कि इन आधुनिक परियोजनाओं से न केवल राज्य में मछली उत्पादन में भारी उछाल आएगा, बल्कि स्वरोजगार के अनगिनत नए अवसर भी पैदा होंगे। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आवेदनों की जांच और जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय-सीमा के भीतर किया जाए। लाभार्थियों को हर कदम पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि वे इस योजना का अधिकतम लाभ उठा सकें।
यह योजना केवल अनुदान नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मछुआरा समुदाय को सशक्त बनाने की एक मजबूत ‘वित्तीय पाठशाला’ है।



