खेल अब सिर्फ शौक नहीं, नई शिक्षा नीति में बना जरूरी विषय
2036 ओलंपिक लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

फिट इंडिया से ओलंपिक टॉप-10 तक का रोडमैप, खेल प्रतिभाओं को तैयार करने पर जोर
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत अब खेलों को केवल मनोरंजन या अतिरिक्त गतिविधि के रूप में नहीं देख रहा है। नई शिक्षा नीति-2020 में खेलों को महत्वपूर्ण स्थान मिलने के बाद बच्चों के शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व विकास में खेल की भूमिका और मजबूत हुई है। संदेश साफ है—स्वस्थ भारत और खेल महाशक्ति बनने के लिए नई पीढ़ी का मैदान से जुड़ना जरूरी है।
कार्यक्रम में भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक आत्म प्रकाश, लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सिंह, निदेशक, सहायक निदेशक मनीष कुमार, अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 ने खेल को शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाकर बच्चों के लिए नई दिशा तैयार की है। आज के दौर में मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया के बीच बच्चों को फिट रखने के लिए खेल केवल पसंद का विषय नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की आवश्यकता बन चुका है।

भारत की नजर अब वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों पर भी है। देश ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है और इसके साथ ही खेलों में भारत को विश्व के शीर्ष देशों की श्रेणी में पहुंचाने की तैयारी तेज करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
लक्ष्य केवल ओलंपिक की मेजबानी करना नहीं, बल्कि पदक तालिका में भारत को टॉप-10 देशों के बीच स्थापित करना है। इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और अनुभवी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
अर्जुन पुरस्कार विजेता ललित उपाध्याय जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का संदेश देती है। खेल के मैदान से निकलने वाली मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ही भारत के भविष्य के चैंपियनों की असली ताकत बनेंगे।
नई शिक्षा नीति में खेलों को मिला महत्व भारत के खेल भविष्य की मजबूत नींव बन सकता है। अब जरूरत है कि स्कूलों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभाओं को अवसर, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि 2036 का सपना केवल मेजबानी तक सीमित न रहे, बल्कि भारत विश्व खेल मानचित्र पर एक नई ताकत बनकर उभरे




