SGB निवेशकों को झटका: समय से पहले पैसा निकालने पर भी कम भाव
9 सितंबर को होगी 'प्रीमैच्योर रिडेम्पशन'

SGB निवेशकों को झटका: समय से पहले पैसा निकालने पर भी कम भाव, 9 सितंबर को होगी ‘प्रीमैच्योर रिडेम्पशन’
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
सरकारी गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम में निवेश करने वाले उन मध्यमवर्गीय निवेशकों के लिए बुरी खबर है, जो आर्थिक तंगी के चलते या ऊंचे भाव का लाभ उठाने के लिए अपने बॉन्ड समय से पहले भुनाना चाह रहे थे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को होने वाली ‘प्रीमैच्योर रिडेम्पशन’ (अकाली मोचन) के लिए भाव तय कर दिया गया है, जो निवेशकों की उम्मीदों से काफी कम है।
कितना है नुकसान? केंद्रीय बैंक ने SGB 2020-21 की सीरीज XII के लिए मोचन मूल्य (रिडेम्पशन प्राइस) मात्र ₹15,355 प्रति यूनिट तय किया है। यह भाव सोने के मौजूदा स्पॉट रेट से काफी कम है। RBI के नियम अनुसार, यह कीमत मोचन तिथि से पिछले तीन कारोबारी दिनों के सोने के औसत भाव पर आधारित है। निवेशकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि सरकार और RBI ने इस बार ‘प्रीमैच्योर’ निकासियों में भी उन्हें बाजार भाव का पूरा लाभ देने के बजाय एक औसत फार्मूले के तहत फंसा दिया है, जबकि यही निवेशक लंबे समय से निवेश को लेकर जोखिम झेल रहे थे।
नियमों की मार गोल्ड बॉन्ड योजना की शर्तों के अनुसार, समयपूर्व मोचन की अनुमति केवल पांच साल पूरे होने पर और उसी तारीख को दी जाती है जब ब्याज देय होता है। हालांकि, निवेशकों के लिए दुखद बात यह है कि मोचन मूल्य का निर्धारण पिछले तीन दिनों के कम भाव को आधार बनाकर किया जाता है, जिससे उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा है। वे निवेशक जो इस स्कीम को सोने में सीधे निवेश के बराबर सुरक्षित मानकर बैठे थे, अब महसूस कर रहे हैं कि यह केवल एक ‘फिक्स्ड रिटर्न’ वाला सरकारी उत्पाद है, जो संकट के समय में भी उन्हें पूरी तरलता प्रदान नहीं करता।


