हेल्थ

|उत्तर भारत की पहली ‘वाइल्डनेस मेडिसिन’

कार्यशाला से COMET 2026 का भव्य आगाज, 600 से अधिक चिकित्सक हुए शामिल

लखनऊ में चिकित्सा जगत का महाकुंभ: SACTEM ने 100 सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को दिया नि:शुल्क आपातकालीन प्रशिक्षण

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी (ABVMU) में शुक्रवार को कॉनक्लेव ऑफ मेडिकल इमरजेंसीज एंड ट्रेमा (COMET 2026) के दूसरे संस्करण का अभूतपूर्व और भव्य आगाज हुआ। ‘स्ट्रेंथनिंग सिस्टम्स – सेविंग लाइव्स’ (प्रणालियों को मजबूत करना – जीवन बचाना) की थीम पर आयोजित इस तीन दिवसीय महाकुंभ का आयोजन सोसाइटी ऑफ एक्यूट केयर, ट्रेमा एंड इमरजेंसी मेडिसिन (SACTEM) और ABVMU के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। उद्घाटन के पहले ही दिन देश भर से आए 600 से अधिक चिकित्सकों, ट्रेमा सर्जनों, एनेस्थेटिस्ट्स, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल विशेषज्ञों ने आठ समानांतर कार्यशालाओं में हिस्सा लेकर आपातकालीन चिकित्सा के नए आयाम गढ़े।

इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत की पहली ‘वाइल्डनेस मेडिसिन’ कार्यशाला रही, जिसका शीर्षक “सर्वाइव, स्टेबिलाइज, इवैक्युएट: वाइल्डनेस मेडिसिन इन एक्शन” था। कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मंगलोर के आपातकालीन चिकित्सा सहायक प्रोफेसर डॉ. निखिल Paul के निर्देशन में चली इस सिमुलेशन-आधारित कार्यशाला में दुर्गम, पर्वतीय और संसाधन-हीन क्षेत्रों में जीवन बचाने के गुर सिखाए गए।

डॉ. पॉल ने इस अनूठी पहल की महत्ता समझाते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम और महाकुंभ आयोजित होते हैं। यहाँ के विशाल जंगलों, नदियों और पहाड़ी इलाकों में बिना अस्पताल के शुरुआती घंटों में मरीज को स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उत्तर भारत में इस प्रशिक्षण की शुरुआत एक मील का पत्थर साबित होगी।” इस सत्र में संदीप शेट्टी, डॉ. नयन श्रीरामुलु, डॉ. मारियो एंटनी और डॉ. रेनी गार्सिया सहइराज ने विशेषज्ञ फैकल्टी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सख्त और दूरदर्शी पहलों के तहत, SACTEM ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से आए 100 सरकारी डॉक्टरों, नर्सों और आपातकालीन तकनीशियनों को पूरी तरह से नि:शुल्क विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया। SACTEM के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मेदांता अस्पताल, लखनऊ के ट्रेमा केयर निदेशक डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया, “सरकारी अस्पतालों के फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मी सबसे अधिक आपात स्थितियों से निपटते हैं। उन्हें रिससिटेशन, वेंटिलेशन और रक्तस्राव नियंत्रण (Hemorrhage Control) के व्यावहारिक कौशल से लैस करना इस सम्मेलन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।”

दिनभर चली इन कार्यशालाओं में पल्स (PULSE) अल्ट्रासाउंड कार्यशाला का नेतृत्व डॉ. अल्का वर्मा ने किया, जिसे ब्रिटेन के जॉर्ज लूसियान तातारू ने chaired किया। इसके अलावा, देश की पहली समर्पित न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी कार्यशाला ‘न्यूरॉन’ (NEURON), दो वेंट प्रो (VENT PRO) मैकेनिकल वेंटिलेशन ट्रैक, तथा प्रो. (डॉ.) समीर मिश्रा के निर्देशन में ट्रेमा, आपदा और कॉम्बैट रेडिनेस पर हुई कार्यशाला ने युवाओं को सड़क दुर्घटनाओं में जान बचाने के अचूक नुस्खे सिखाए। नर्सिंग और एलाइड हेल्थ कार्यशाला का संचालन डॉ. मुस्तहसिन मलिक और मेदांता की प्रेसिला फर्नांडीस ने किया।

आयोजन सचिव डॉ. सुभankar पॉल ने कहा, “कार्यशालाओं में 600 से अधिक प्रतिनिधियों की रिकॉर्ड उपस्थिति यह साबित करती है कि आपातकालीन चिकित्सा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी टीम का सामूहिक प्रयास है।”

शनिवार, 12 सितंबर को मुख्य सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, यूके, यूएई, नेपाल और श्रीलंका के दिग्गज चिकित्सक अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, डॉ. आलोक ए. गांगुर्दे के नेतृत्व में देश भर के रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच राष्ट्रीय सिमुलेशन चैंपियनशिप ‘बैटल ऑफ द Bays’ के रोमांचक मुकाबले आयोजित किए जाएंगे।

विस्तृत जानकारी के लिए देखें: SACTEM COMET 2026

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