उत्तर प्रदेश

यूपी सिविल सचिवालय सहकारी बैंक पर RBI की पाबंदियां तीन महीने और बढ़ीं

11 सितंबर को खत्म होने वाली दिशा-निर्देश अवधि अब 11 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी, RBI ने वित्तीय स्थिति पर संतुष्टि से किया साफ इनकार

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

लखनऊ स्थित यू.पी. सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का सख्त रुख बरकरार है। बैंक पर लागू नियामकीय दिशा-निर्देशों की अवधि समाप्त होने से पहले RBI ने इन्हें तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया है। अब ये निर्देश 11 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। हालांकि RBI ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अवधि बढ़ाए जाने को बैंक की वित्तीय स्थिति से उसकी संतुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

RBI ने 11 मार्च 2026 को बैंक के संबंध में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A को धारा 56 के साथ पढ़ते हुए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनकी अवधि छह महीने के लिए तय की गई थी, जो 11 सितंबर 2026 को समाप्त होनी थी। अब सार्वजनिक हित में इन्हें आगे जारी रखना आवश्यक मानते हुए RBI ने तीन महीने का विस्तार दिया है।

इस विस्तार ने बैंक के सामने मौजूद नियामकीय दबाव को फिर रेखांकित कर दिया है। RBI ने अपने आदेश में साफ कहा है कि निर्देशों की अवधि बढ़ाने या उनमें किसी संशोधन का अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि केंद्रीय बैंक बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।

बैंकिंग क्षेत्र में नियामकीय दिशा-निर्देश सामान्य निगरानी से आगे की स्थिति को दर्शाते हैं। ऐसे में अवधि का लगातार बढ़ना बैंक के लिए राहत से अधिक चुनौती का संकेत माना जा सकता है। हालांकि RBI के ताजा आदेश में बैंक की वित्तीय स्थिति से जुड़ी कोई नई विशिष्ट वजह या आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले जारी किए गए दिशा-निर्देशों की अन्य सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। यानी बैंक को पहले से लागू नियामकीय शर्तों के दायरे में ही काम करना होगा।

RBI का यह फैसला बैंक के खाताधारकों और हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। आदेश से इतना स्पष्ट है कि नियामकीय निगरानी फिलहाल खत्म नहीं हुई है और बैंक को लेकर RBI की समीक्षा जारी रहेगी।

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