वतन पर जान न्योछावर कर वीर अब्दुल हमीद ने लिखी देशभक्ति की अमर गाथा
अनीस मंसूरी बोले—शहीद कभी मरते नहीं, उनका बलिदान पीढ़ियों को देता रहेगा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
1965 के भारत-पाक युद्ध के अमर नायक और परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद ने अपने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से देशभक्ति की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे देश हमेशा गर्व के साथ याद करेगा। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद ने दुश्मन के शक्तिशाली पैटन टैंकों का मुकाबला करते हुए देश की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उनका साहस आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
लालबाग स्थित संगठन के कार्यालय में वीर अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि पर आयोजित ईसाल-ए-सवाब एवं खिराज-ए-अकीदत कार्यक्रम में अनीस मंसूरी ने कहा कि देश की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि उनका त्याग और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रहते हैं।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देश की सेवा, ईमानदारी, त्याग और इंसानियत को जीवन का आधार बनाया जाए। उनके अनुसार राष्ट्र की मजबूती केवल सीमाओं की सुरक्षा से नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और जिम्मेदारी की भावना से भी होती है। उन्होंने युवाओं से देश की तरक्की और सुरक्षा के लिए एकजुट होकर योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन की तिलावत, दरूद-ए-पाक और फातेहा से हुई। उपस्थित लोगों ने शहीद वीर अब्दुल हमीद की मगफिरत और ईसाल-ए-सवाब के लिए दुआ की। इसके बाद उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति और कौमी एकता का संदेश भी प्रमुखता से उभरा।
अबू बक्र इदरीसी ने उत्तर प्रदेश सरकार से वीर अब्दुल हमीद के नाम पर सैन्य महाविद्यालय स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा संस्थान युवाओं में सेना के प्रति सम्मान और देशसेवा का जज्बा मजबूत कर सकता है।
कार्यक्रम में चौधरी शादाब कुरैशी, दौलत अली घोसी, एजाज अहमद, कारी शफीक आलम, मौलाना इलियास मंसूरी, पप्पू कुरैशी, जुनैद कुरैशी, सबीहा सुल्ताना, मोहम्मद कलीम गुड्डू, नरेंद्र सिंह यादव, राम प्रकाश मौर्या और सिराज मंसूरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



