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बैंकों की कर्ज वृद्धि 15.9% पहुंची, अर्थव्यवस्था में मजबूत मांग के संकेत

(निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क)

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 15.9 प्रतिशत की मजबूत ऋण वृद्धि दर्ज की है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती मांग और गतिविधियों का संकेत देती है। यह वृद्धि पिछले वर्ष के 10.9 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है और बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है।

कृषि और संबद्ध क्षेत्र में ऋण वृद्धि 15.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष 10.4 प्रतिशत थी। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और किसानों को मिल रहे बेहतर वित्तीय समर्थन को दर्शाता है।

औद्योगिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जहां ऋण वृद्धि लगभग दोगुनी होकर 15 प्रतिशत हो गई है। खासतौर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में तेज गति से ऋण वितरण हुआ है, जिससे उत्पादन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना बढ़ी है।

सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष 12 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से एनबीएफसी, व्यापार और वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण हुई है।

व्यक्तिगत ऋण खंड में भी 16.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें वाहन ऋण और सोने के बदले दिए जाने वाले ऋणों की मांग प्रमुख रही, जबकि आवास ऋण में स्थिर वृद्धि देखी गई।

मार्च 2026 तक कुल बकाया ऋण 212.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.2 लाख करोड़ रुपये अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम ब्याज दर, सरकारी पूंजीगत व्यय और सुधारों के चलते निजी निवेश में तेजी आई है, जिससे ऋण मांग को बढ़ावा मिला है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है और बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर पूंजी स्थिति, कम एनपीए और बढ़ती लाभप्रदता इसे और सशक्त बना रही है।

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