नाम बदलने की राजनीति पर फिर छिड़ा संग्राम
संत रविदास नगर की बहाली पर बसपा ने भाजपा का जताया आभार, सपा पर साधा तीखा निशाना

अन्य जिलों के पुराने नाम बहाल करने की मांग से यूपी की सियासत में नई चर्चा
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जिलों के नामकरण को लेकर राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। राज्य सरकार द्वारा भदोही का नाम पुनः संत रविदास नगर किए जाने के निर्णय का बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने खुले तौर पर स्वागत करते हुए भाजपा सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। वहीं समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बसपा ने आरोप लगाया कि उसने जातिवादी और संकीर्ण राजनीतिक सोच के चलते महापुरुषों के नाम पर स्थापित जिलों की पहचान बदल दी थी।
बसपा के आधिकारिक बयान में कहा गया कि उसकी सरकार ने प्रशासनिक दक्षता और जनहित को ध्यान में रखते हुए कई नए जिले, तहसीलें, विकास खंड और पुलिस जोन बनाए थे। साथ ही संत रविदास, छत्रपति शाहूजी महाराज, मान्यवर कांशीराम और अन्य महापुरुषों के नाम पर जिलों का नामकरण सामाजिक सम्मान और समावेशी राजनीति का प्रतीक था। पार्टी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद इन नामों को बदलकर सामाजिक न्याय की भावना को ठेस पहुंचाई।
बसपा ने केवल संत रविदास नगर तक ही अपनी मांग सीमित नहीं रखी, बल्कि कांशीराम नगर सहित अन्य जिलों के पुराने नाम भी बहाल करने की मांग उठाई। पार्टी ने सुझाव दिया कि यदि मान्यवर कांशीराम के 9 अक्टूबर के परिनिर्वाण दिवस से पहले या उसी दिन यह निर्णय लिया जाता है, तो इसे सामाजिक सम्मान की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा का यह रुख प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। भाजपा सरकार के फैसले की सार्वजनिक सराहना और सपा पर तीखे हमले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि, किसी संभावित राजनीतिक समीकरण या गठबंधन को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में महापुरुषों के नाम, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पहचान की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। आने वाले महीनों में सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है, इस पर राजनीतिक दलों और जनता दोनों की निगाहें टिकी रहेंगी।



