अखिलेश यादव ने सीमाओं की सुरक्षा व संवैधानिक अधिकारों पर दिया हुंकार
1. शौर्य सम्मान और संवैधानिक मूल्य

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क,
राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में कारगिल विजय दिवस और संविधान मानस्तंभ स्थापना दिवस अपूर्व गरिमा के साथ मनाया गया। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कारगिल युद्ध के पराक्रमी योद्धा लांस नायक राम भुवाल को शाल व स्मृतिचिह्न भेंट कर नमन किया। उन्होंने रेखांकित किया कि 26 जुलाई केवल सैन्य शौर्य का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के संवैधानिक संकल्पों को धरातल पर उतारने का स्वर्णिम पर्व है।
राष्ट्रीय सीमाएं और कूटनीतिक नीति
पूर्व सैनिकों को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव ने सीमाओं की अखंडता पर गहरा चिंतन व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश का भू-भाग आजादी के समय जैसा था, वैसा ही सुरक्षित रहना चाहिए। रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व के तनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने वर्तमान वैश्विक कूटनीति पर सवाल उठाए और कहा कि प्रभावी कूटनीतिक दूरदर्शिता के अभाव में ही देश आर्थिक दबाव और उर्वरक संकट झेलने को विवश हुआ है।
युवा चेतना और लोकतंत्र का भविष्य
दिल्ली में युवाओं के जनांदोलन को लोकतांत्रिक बदलाव की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ की यह निर्भीक चेतना सत्ता के दमनकारी तंत्र के अंत की शुरुआत है। जब-जब सरकारें वास्तविक जनमुद्दों से भागती हैं, वे चरित्र हनन का सहारा लेती हैं। उन्होंने प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक और संस्थागत भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया।
2027 का महासंग्राम और मत अधिकार
अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि भावी परिसीमन के कुचक्रों से लोकतंत्र को बचाना ही होगा। मताधिकार ही आम नागरिक की सबसे मजबूत ढाल है। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को संवैधानिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का निर्णायक अवसर घोषित किया।




