भारत-कोरिया की ऊर्जा साझेदारी हुई और मजबूत, सप्लाई चेन सुरक्षा पर बड़ा कदम
हिंद-प्रशांत में ऊर्जा संतुलन की नई रणनीति, LNG और शिपबिल्डिंग पर फोकस तेज

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क)
भारत और कोरिया गणराज्य के बीच ऊर्जा संसाधन सुरक्षा को लेकर जारी संयुक्त वक्तव्य ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दी है। यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, पारदर्शिता और समृद्धि को सुनिश्चित करना है।
दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि उनकी विशेष रणनीतिक साझेदारी का आधार मजबूत आर्थिक और ऊर्जा सहयोग है। यह सहयोग खुले बाजार, नियम-आधारित व्यापार और आपसी विश्वास पर आधारित है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और बाजार स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है, जिसे ध्यान में रखते हुए भारत और कोरिया ने मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है।
भारत, कोरिया गणराज्य को नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम फीडस्टॉक का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि कोरिया भारत को पेट्रोलियम उत्पादों और लुब्रिकेंट बेस ऑयल की आपूर्ति करता है। इस द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को और सुदृढ़ करने के लिए दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।
ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) को गति देने के साथ-साथ दोनों देशों ने LNG (Liquefied Natural Gas) क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। एक प्रमुख LNG उपभोक्ता के रूप में, बाजार की पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।
इसके अलावा, जहाज निर्माण (Shipbuilding) को ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा मानते हुए, भारत और कोरिया ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत में शिपयार्ड स्थापित करने, मौजूदा शिपयार्ड का आधुनिकीकरण करने, तकनीकी विकास और मानव संसाधन प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल ऊर्जा संसाधनों के सुरक्षित और कुशल परिवहन को सुनिश्चित करेगी।
दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों से भी अपील की है कि वे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को खुला और सुरक्षित बनाए रखने में सहयोग करें। यह न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा और समृद्धि को भी सुनिश्चित करेगा।
भारत-कोरिया की यह साझेदारी भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



