जीआई टैग से वैश्विक पहचान की नई उड़ान
कारीगरों, किसानों और बुनकरों के लिए खुल रहे वैश्विक बाजार

परंपरा से प्रगति तक: भारत की सांस्कृतिक धरोहर बन रही आर्थिक शक्ति
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत अब केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की नई ताकत बनकर उभर रही है। भौगोलिक संकेत (GI) टैग भारतीय उत्पादों को विश्व बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के साथ-साथ कारीगरों, किसानों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादकों के लिए आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है। कॉमर्स एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब 800 से अधिक जीआई पंजीकृत उत्पाद हैं, जिनमें से 607 टैग वर्ष 2014 के बाद प्रदान किए गए, जो इस क्षेत्र में तेज़ प्रगति का प्रमाण है।
विरासत की सुरक्षा, आय में बढ़ोतरी
जीआई टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान, गुणवत्ता और पारंपरिक शिल्प कौशल की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है और असली उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य मिलता है। वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, जीआई टैग मिलने से ग्रामीण कारीगरों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
उत्तर प्रदेश बना देश का जीआई चैंपियन
देश में 81 जीआई टैग उत्पादों के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। बनारसी साड़ी, बनारस गुलाबी मीनाकारी, कन्नौज इत्र और मुजफ्फरनगर गुड़ जैसे उत्पाद वैश्विक बाजारों में भारतीय पहचान को मजबूत कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर के जीआई टैग वाले गुड़ का सफल निर्यात बांग्लादेश तक पहुंच चुका है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
सरकार का व्यापक प्रोत्साहन
केंद्र सरकार जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पीएम एकता मॉल, वन स्टेशन वन प्रोडक्ट, एमएसएमई अभिनव योजना, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, एपीडा निर्यात अभियान तथा पर्यटन आधारित जीआई ट्रेल जैसी योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता, विपणन और निर्यात अवसर उपलब्ध करा रही है। 2025 में जीआई आवेदन शुल्क में 80 प्रतिशत तक कमी और नवीनीकरण शुल्क को ₹3000 से घटाकर ₹500 करना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
2030 का लक्ष्य: 10,000 जीआई पंजीकरण
भारत सरकार वर्ष 2030 तक 10,000 जीआई पंजीकरण का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और निर्यात आधारित विकास की रणनीति को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।




