उत्तर प्रदेश

एटीएस न होने पर भी नहीं रुकेगी प्रक्रिया—परिवहन अधिकारियों को मिला अधिकार

मोर्थ की नई गाइडलाइन से राहत—अब अपने ही जिले में होगा वाहन फिटनेस टेस्ट

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में वाहन स्वामियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के अनुरोध पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे अब उन जनपदों में भी वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र जारी हो सकेगा जहां ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) अभी स्थापित नहीं हैं।

नई व्यवस्था के तहत, जिन जिलों में एटीएस निर्माणाधीन है या प्रक्रिया में है, वहां परिवहन विभाग के अधिकारी ही वाहनों की फिटनेस जांच कर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। इससे पहले वाहन स्वामियों को अपने जिले से दूसरे जिले में स्थित एटीएस तक जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी।

प्रदेश में फिलहाल 26 जनपदों में 31 एटीएस संचालित हो रहे हैं, जिनके माध्यम से वाहनों की फिटनेस जांच की जा रही है। वहीं 40 अन्य जनपदों में एटीएस निर्माण का कार्य तेजी से जारी है। सरकार ने इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए सख्त टाइमलाइन भी तय की है।

मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पारदर्शी परिवहन व्यवस्था लागू करना है। नई गाइडलाइन से जहां आम जनता को राहत मिलेगी, वहीं व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी।

यह कदम न केवल वाहन स्वामियों के लिए सहूलियत लाएगा बल्कि प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।


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