जीरो टॉलरेंस’ पर भ्रष्टाचार का दाग! लखनऊ में टिके रहने के लिए लाखों की घूस के आरोप
यूपी आयुष विभाग में ट्रांसफर का बड़ा खेल: महानिदेशक दरकिनार, नियमों की उड़ी धज्जियाँ

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग में इस बार एक ऐसा तबादला बम फूटा है जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल इस विभाग में नियमों को ताक पर रखकर सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर कर दिए गए। हैरान करने वाली बात यह है कि विभाग की सर्वोच्च प्रशासनिक मुखिया, महानिदेशक (डीजी) आयुष चैत्रा वी. को पूरी तरह से दरकिनार कर यह खेल खेला गया।
सूत्रों और विभाग के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, इन तबादलों के पीछे भारी सेटिंग और लाखों रुपये के लेनदेन का खेल चल रहा है। चर्चा है कि लखनऊ में तैनात कुछ रसूखदार कर्मियों को लखनऊ में ही दूसरी जगह बनाए रखने के लिए ₹10 लाख तक की घूस दी गई है। इतना ही नहीं, मुख्यालय स्तर पर कनिष्ठ बाबुओं (जूनियर असिस्टेंट) को वरिष्ठ बाबुओं (सीनियर असिस्टेंट) के पदों पर बैठा दिया गया है। ऐसा ही एक मामला जावेद अंसारी का सामने आया है। इसके अलावा लखनऊ के एक मेडिकल अफसर का ट्रांसफर भी नियमों को ताक पर रखकर लखनऊ के भीतर ही कर दिया गया। इस पूरे खेल में कुछ खास चेहरों (भांजे श्री और मठाधीश इकबाल अहमद) के आगे पूरा सिस्टम नतमस्तक नजर आ रहा है। जब विभाग की एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की कोशिश की, तो उन्हें भी किनारे लगा दिया गया।
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब महानिदेशक आयुष चैत्रा वी. ने मुख्य सचिव को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा। पत्र में साफ कहा गया है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी निदेशालयों में स्थानांतरण नीति 2026-27 का खुला उल्लंघन हुआ है। शासनादेश के अनुसार, समूह ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के किसी भी कर्मचारी का ट्रांसफर विभागाध्यक्ष (महानिदेशक) के अनुमोदन के बिना नहीं हो सकता। इसके बावजूद निदेशकों ने बिना कोई मंजूरी लिए मनमाने ढंग से ट्रांसफर आर्डर जारी कर दिए।


